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देश की स्मृतियां काशी की परंपरा और संस्कृति की यादों लेकर रवाना हुये जी-20 के 200 डेलीगेट्स

 

टीम आईबीएन न्यूजe1cb22c5 fe12 400d 979c 9c16eed80b27

वाराणसी : तमाम यादों के साथ काशी मे तीन दिवसीय जी-20 सम्मेलन समापन हो गया. सम्मेलन में आए 200 विदेशी मेहमानों ने भारत की संस्कृति, सभ्यता और यहां की परंपराओं के बारे में जाना और समझा. इन सबके बीच कल हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद आज सुबह जी-20 देशों के मेहमान भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचे. यहां म्यूजियम में रखे गए लगभग 500 साल पुराने अशोक स्तंभ को देखा. इस दौरान कई यादों को अपने कैमरों में कैद भी किया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अशोक स्तंभ की तस्वीरें अपने मोबाइल के कैमरे में कैद की.

सारनाथ पहुंचे विदेशी मेहमानों के साथ विदेश मंत्री का भव्य स्वागत किया गया. मेहमानों ने प्राचीन खंडहर स्मारक धमेख स्तूप, भगवान बुद्ध के उपदेश स्थली और पुरातत्व विभाग के अधीन संचालित होने वाले सारनाथ म्यूजियम को देखा।

गुप्तकालीन धमेख स्तूप के बारे में विदेशी मेहमानों को जानकारी दी गई. इस दौरान मेहमानों ने मयूर नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लुत्फ उठाया.a0caff0c bcd5 46d4 be95 8262591b4f96

मेहमानों ने अशोक स्तंभ भी देखा.
भ्रमण के दौरान मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में विदेश मंत्री ने कहा कि काशी का जी-20 सम्मेलन अद्भुत रहा. उन्होंने कहा कि कल जी-20 ने लाइफ स्टाइल फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर सहमति बनाई. यह वास्तव में मां गंगा की ही प्रेरणा है. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से शानदार और उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए मैं सीएम योगी का आभार व्यक्त करता हूं. वहीं सारनाथ पहुंचे मेहमानों को यहां के पौराणिक और प्राचीनता से परिचित कराने के लिए 115 विशेष गाइडों का ग्रुप लगाया गया था.

प्रतिनिधियों को बताया गया कि सारनाथ म्यूजियम में भारत के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ की जो बनावट है वह 2273 साल पुरानी है. एक गाइड द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इसी का प्रतिरूप भारत के नए संसद भवन के ऊपर लगाया गया है. यह ओरिजिनल स्तंभ लाल बलुआ पत्थरों से तैयार किया गया है, जो चुनार का है. इसके बाद मेहमानों ने दिल्ली गेट में म्यूजियम के अंदर भगवान बुद्ध की गुप्तकालीन प्राचीन मूर्तियों को देखा.

विदेशी मेहमानों ने गुप्त काल में बने 43.6 मीटर ऊंचे और 28 मीटर चौड़े धमेख स्तूप की परिक्रमा भी की. इसके अलावा स्तूप पर लगे सिलापट और गाइड से उसके इतिहास के बारे में जानकारियां ली. इसके बाद भगवान बुद्ध के उपदेश स्थली पहुंचे. डेलीगेट्स भगवान बुद्ध और शिक्षा-दीक्षा ले रहे उनके पांच शिष्यों की मूर्तियों को देखकर भावविभोर दिखाई दिए. इन विदेशी मेहमानों को आज होटल ताज से सारनाथ तक ले जाने के लिए विशेष ग्रीन रूट तैयार किया गया था. इससे जरिए इन मेहमानों को भारत की स्मृतियां और काशी की परंपरा और संस्कृति की यादों को लेकर यहां से रवाना किया गया।

राकेश की रिपोर्ट

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