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गाजीपुर – समाजसेवी की शानदार पहल अति प्राचीन मंदिर में होगी ब्रहर्षि विश्वामित्र के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, धर्मावलम्बियों में खुशी की लहर

राकेश की रिपोर्ट

गाजीपुर: 35 वर्ष लगातार सोचने वाले महंत अखिलेश्वर दास का सपना साकार हुआ और रामजानकी के प्राचीन मंदिर में महर्षि विश्वामित्र की मूर्ति स्थापित करने की तिथि तय हो गयी। कहा जाता है कि होइहै वही जो राम रूचि राखा यह कहावत जिले में चरितार्थ होने वाली है जिसकी तैयारियॉ धूमधाम से की जा रही है। मंदिर से जुड़े लोग स्थान चिन्हाकंन के बाद 18 सितम्बर को भूमि पूजन के अंतिम चरण में काम कर रहे हैं।

नगर के किला कोहना मुहल्ले में स्थित एक मंदिर के पुजारी ने जिले के निवासी व व्यवसायी होने के साथ-साथ समाजसेवी की भूमिका निभाने वाले संजय सिंह से निवेदन कर मुहल्ले में निर्मित हो रहे मंदिर परिसर में महर्षि विश्वामित्र की मूर्ति स्थापित कराने का निवेदन किया जिसपर श्री सिंह ने सहर्ष सहमति दे दी और कारीगरों को बेहतर मूर्ति बनाने का आर्डर देने के साथ-साथ भुगतान भी कर दिया। लाखों की लागत से निर्मित महर्षि विश्वामित्र की सजीव मूर्ति जब यहॅा पहुंची तो मंदिर के लोगो व कुछ असामाजिक तत्वों ने मूर्ति को लगाने में व्यवधान खड़ा करना शुरू कर दिया और मूर्ति की स्थापना नही हो पायी। मूर्ति महीनो तक जिला मुख्यालय पर पड़ी रही। इस बात की सूचना जब रामजानकी मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास को हुई तो उन्होनें से श्री सिंह से निवेदन कर मूर्ति स्थापना महर्षि विश्वामित्र के हजारो साल पुराने मंदिर लंका मैदान मंे लगाने का प्रस्ताव रखा जिसपर लोग सहमत हो गये।

इसी क्रम में महीनों से जिला मुख्यालय पर पड़ी लाखों की लागत से निर्मित की गयी महर्षि विश्वामित्र की सजीव मूर्ति की स्थापना का समय शुरू हो गया। इस बारे में बात करते हुए श्री अखिलेश्वर दास ने बताया कि यह मठ काफी पुराना है। चार विश्वा मे मौजूद टीले पर स्थित इस परिसर में ही महर्षि विश्वामित्र का जन्म हुआ था। यह स्थान महाराजा गाधि का किला के बीच था और उनकी माता जी का शयनकक्ष था सुखद संजोग की बात है कि महर्षि की प्रतिमा स्वतः उनके यहॅा तक पहुंची है और उसकी स्थापना के साथ-साथ विशाल भण्डारे का भी आयोजन करने का अवसर मंदिर से जुड़े लोगों को मिल रहा है। श्री दास ने बताया कि महावीर दास जी, नारायण दास जी, सीताराम बाबा के बाद बैरागी बाबा यहॅा महंत के रूप में रहते थे। उसके पहले इस मंदिर की महंत एक महिला साध्वी थी जिनकी समाधि परिसर में मौजूद हैं।

महर्षि विश्वामित्र के मूर्ति की स्थापना के लिये मंदिर परिसर में भी स्थान चिन्हित किया गया है और 30 फुट चौड़ी व इतनी ही लम्बी जगह में मूर्ति की स्थापना का काम होगा। मौजूदा समय में अखिलेश्वर दास ने इस प्राचीन सनातन मंदिर की देख रेख का जिम्मा है। बाबा परेशान है कई भूमाफिया बड़े अपराधी व जाति विशेष के लोग मंदिर की जमीनों पर कब्जा जमाकर बाबा को कचहरी दौड़ाते रहते है लेकिन महर्षि की प्रतिमा स्थापित होने की खुशी से बाबा गदगद है और शहर वासियों को भी महर्षि के दर्शन का सौभाग्य दिलाने के लिये दिन रात प्रयत्नशील है।

टीम आईबीएन न्यूज

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