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गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों से होती है विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान- कुलपति

रिपोर्ट ब्यूरो

गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के प्राचीन, इतिहास पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग में शुक्रवार को ’प्राचीन इतिहास में शोध-प्रविधि’ विषय पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो0 राजेश सिंह ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से ही विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान बनती है। विश्वविद्यालय की पहचान विद्यार्थियों द्वारा किये गये शोध कार्यों से होती है। शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रिसर्च मेथडोलाॅजी पर विश्वविद्यालय के हर विभाग में कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कुलपति ने शोधार्थियों को शोध के नए प्रकल्पों को समझने की सलाह दी।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व एवं विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो0 सीताराम दुबे ने प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विषय नवीन शोध हेतु संभावनाओं से भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि शोध प्रविधि के प्रयोग से ही शोध में गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि पूर्व अध्यक्ष प्रो0 विपुला दुबे ने शोध विषम के चयन, शोध प्रकल्प एवं परिकल्पनाओं के निर्माण आदि की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि ने प्राचीन इतिहास विषय में शोध की नई संभावनाओं की ओर इंगित किया।

स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो0 शीतला प्रसाद सिंह ने दिया। विभागाध्यक्ष ने कहा कि यह कार्यशाला शोध छात्रों के साथ-साथ परास्नातक के विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। विषय प्रवर्तन प्रो0 राजवन्त राव द्वारा किया गया। संचालन डाॅ0 रामप्यारे मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 दिग्विजय नाथ ने किया। कार्यशाला में प्रो0 प्रज्ञा चतुर्वेदी, डाॅ0 डी0एन0 दुबे, डाॅ0 पद्मजा सिंह, डाॅ0 मणिन्द्र यादव, डाॅ0 कन्हैया सिंह सहित 100 से ज्यादा प्रतिभागियों की मौजूदगी रही।

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