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अनुभव हीन पुत्रो के आचरण व लोस प्रभारी की सामंती सोच से हारे पारस राय,भष्मासुर बनी एल जी मनोज सिन्हा की भूमिका

 

टीम आईबीएन न्यूज

राकेश की रिपोर्ट

अफजाल अंसारी की ऐतिहासिक जीत से कई बार सासद व मंत्री रहे मौजूदा समय मे जम्मू के एल जी मनोज सिन्हा के साथ युवा पुत्र अभिनव सिन्हा के लिए जिले की राजनीतिक जमीन बंजर हो चुकी है। अब लगने लगा है कि मनोज सिन्हा के समर्थक उनके ही कारखासो का शिकार होकर पाला बदलने को मजबूर हो गये है।

यही नही कई चुनावो मे लोकसभा प्रभारी रहकर अपनी डफली अपना राग अलापने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्ण बिहारी राय के लिए भी भाजपा मे काशी प्रान्त प्रभारी तक पहुचने के बाद अब आगे की राह आसान नही दिखती। जबकि सभी संसाधनो की अतिशयोक्ति के बाद भी करारी हार की जिम्मेदारी से मौजूदा अध्यक्ष सुनील सिंह भी अछूते नही रहेगे।

दूसरी तरफ यह भी चर्चा ही नही एक निर्दल उम्मीदवार ने तो इतना तक आरोप लगा दिया कि जिले मे मनोज सिन्हा की राजनीतिक दखल समाप्त करने के लिए तीन भूमिहार दिग्गज लगातार लगे हुये हे लेकिन मनोज सिन्हा के एल जी बनने के बाद राहत की सास ले रहे त्रिदेव की तिकड़ी अभिनव सिन्हा की अचानक एन्ट्री से बिदक गयी और यह मानकर लोकसभा चुनाव मे अपनी भूमिका तय कर दिया कि यह चुनाव या तो त्रिदेव का जो भी हो गाजीपुर से भाजपा मे मनोज काल का समापन हो जाय परिणाम आपके सामने है।

विधानसभा चुनाव के दौरान लगाता सभी विधान सभा क्षेत्र मे आचार संहिता के दौरान पूजन व तेरही की आड मे महीने भर चक्रमण करने के बाद भाजपा का जिले मे खाता ही नही खुला जो विधायक थे वह भी हार गये और मनोज सिन्हा की जमकर किरकिरी हुई ।

लेकिन मनोज सिन्हा ने लोकसभा चुनाव के दौरान जम्मू से लगातार गाजीपुर आते रहे जन्म दिन तेरही बीमार का हालचाल गोष्ठी पुरस्कार वितरण स्वागत समारोह की आड मे समूचे लोकसभा क्षत्र मे अपने समर्थको से मिलकर आशिर्वाद देते रहे। वोट देने भी अपने गाव आये लेकिन जब गिनती हुई तो ,,,,,।

दूसरी तरफ मनोज सिन्हा के करीबी रहे हारे उम्मीदवार पारस राय को लोस प्रभारी ने टिकट मिलने के साथ ही एलजी के कथित शुभचिन्तक ने दो दर्जन से अधिक पत्रकारो को ही लेकर भ्रमित कर पत्रकारीता के नाम पर उधम मचाने वाले कुछ माननीयो को सम्मानित कर दिया जिससे जिम्मेदार मीडियाकर्मी मौन होकर किनारे हो गये।

नाम न छापने की शर्त पर एल जी के अति खास ने बताया कि सिर्फ पत्रकार ही नही शिक्षक अधिवक्ता ब्यापारी छात्र युवा मजदूर जो भी मनोज सिन्हा का करीबी है इस चुनाव मे उम्मीदवार पारस राय से जरूर मिला ऐसे लोगो की संख्या हजारो मे है । लेकिन सबको श्री राय ने लोस प्रभारी के पास भेज दिया लेकिन हर सहयोगी श्री प्रभारी व मीडिया प्रभारी व जिलाध्यक्ष की परिक्रमा के बाद आचरण देख वापस लौटने मे ही अपना सम्मान समझा।

जबकि श्री राय के पुत्र गण भी लोस प्रभारी के अति विश्वास से इतना प्रभावित थे कि उनके घर जाने वाले श्री पारस राय के सहयोगीयो से ऐसा आचरण करने लगे जैसे सामने वाला कुछ मागने के लिए याचना के लिए आया है। ऐसे ही एक पत्रकार ने तो आजिज आकर कृष्ण बिहारी की पोल ही खोल दिया।

एक तरफ पुत्रो की अल्प जानकारी तधा लोसप्रभारी के कुशल प्रबंधन का घटिया परिणाम पारस राय जैसे बेहतर उम्मीदवार व मनोज सिन्हा जैसे सधे राजनीतिक सोच व संसाधनो को पलीता लगा दिया। जिसकी जिले भर मे जोरदार चर्चा है।

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