जगह-जगह हुआ हवन-पूजन, विधि-विधान के साथ मंदिर में की गई स्थापना; हजारों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे
भंडारी माता के डोली में पचास हजार से ज्यादा श्रद्धालु रहे
विकास अग्रहरि
मीरजापुर। मां भंडारी देवी मंगलवार को डोली पर सवार होकर अपने मायके राजा कर्णपाल के पहाड़ से मुख्य मंदिर के लिए रवाना हुईं। मां की डोली का रास्ते में जगह-जगह हवन-पूजन और आरती के साथ स्वागत किया गया।
देर शाम डोली अहरौरा डीह स्थित शायर देवी मंदिर पहुंची, जहां देर रात तक हवन-पूजन के बाद मां भंडारी देवी की डोली मुख्य मंदिर के लिए रवाना हुई। पहाड़ पर पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ मां को मंदिर में स्थापित किया गया।
मां का डोला लाने के लिए मंगलवार सुबह से ही अहरौरा डीह स्थित शायर देवी मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। यहां विधिवत हवन-पूजन के बाद श्रद्धालु सीयुर गांव के दक्षिण दिशा में स्थित राजा कृपाल बाबा के पहाड़ पर पहुंचे।
वहां कहार प्रेमचंद, बबलू, रामसेवक और चंदन ने डोली तैयार की। इसके बाद दर्शनार्थी सुक्खू बाबा विश्वकर्मा ने करीब चार घंटे तक पूजन-अर्चन कर मां को डोली में विराजमान कराया।
मां के डोली में विराजमान होते ही पुजारी जयप्रकाश पांडेय, अजय पांडेय, आशु पांडेय, विनय गुप्ता, शिशिर पांडेय और विष्णुपति चौबे सहित हजारों श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए डोली लेकर आगे बढ़े। रास्ते में जगह-जगह प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया गया।
राजा कर्णपाल के पहाड़ से डोली नीचे आने के बाद सीयुर गांव के दक्षिण दिशा में पहाड़ के नीचे खेत में डोली को कुछ देर के लिए रखा गया। यहां महिलाओं ने धार देकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद कहार डोली लेकर आगे बढ़े।
भगवानपुर गांव में नीम के पेड़ के पास डोली पहुंचने पर फिर हवन-पूजन किया गया। इसके बाद डोली जुड़ई बगीचे के पास पहुंची, जहां भी श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया। रास्ते में कई अन्य स्थानों पर पूजा-अर्चना के बाद देर शाम डोली अहरौरा डीह स्थित शायर देवी मंदिर पहुंची।
शायर देवी मंदिर पर देर रात तक हवन-पूजन चलता रहा। इसके बाद कहार मां की डोली लेकर मुख्य मंदिर के लिए रवाना हुए। पहाड़ पर पहुंचने के बाद विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मां भंडारी देवी को मंदिर में स्थापित किया गया।
मां के सवार होते ही वजनी हो जाता है डोला
अहरौरा डीह निवासी शिशिर पांडेय ने बताया कि राजा बाबा के पहाड़ पर दर्शनार्थी पूजन-अर्चन के बाद मनवना कर मां को डोली में विराजमान कराते हैं। मान्यता है कि मां के डोली में सवार होते ही डोली का वजन अपने आप बढ़ जाता है।
और उन्होंने बताया कि भंडारी देवी का डोला प्रत्येक तीसरे वर्ष राजा कर्णपाल के पहाड़ से मुख्य मंदिर तक आता है। मां अपने मंदिर से कब वापस जाती हैं, यह कोई नहीं जानता। हालांकि, उन्हें पुनः मंदिर में लाने के लिए तीसरे वर्ष भक्त गाजे-बाजे के साथ पहाड़ पर जाते हैं।
इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। डोली यात्रा के दौरान श्रद्धालु नाचते-गाते और मां के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं।
चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था
डोली यात्रा को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अहरौरा डीह स्थित शायर माता मंदिर पर सुबह से ही थानाध्यक्ष अजय मिश्रा पुलिस और पीएसी बल के साथ डोली के साथ चलते रहे।
वहीं सीयुर से दोपहर करीब दो बजे पुलिस फोर्स मां की डोली के साथ भंडारी देवी मंदिर के लिए रवाना हुई। सुरक्षा व्यवस्था में अहरौरा थाना पुलिस के साथ आसपास के कई थानों के थाना प्रभारी और पुलिस बल तैनात रहे। पुलिसकर्मी पूरे यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था पर नजर बनाए रहे।