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जिले में बिजली का मीटर चेंज करने का हो रहा अजब खेल

 

जिलामुख्यालय समेत पूरे जिले में खेला जा रहा बिजली मीटर चेंज करने का खेल

जिम्मेदार सब जानते हुए भी बने रहते है मूकबधिर ,जांच होने पर हो सकता है बड़ा खुलासा

ब्यूरो चीफ मुकेश मिश्र

अंबेडकरनगर – जिला मुख्यालय से लेकर पूरे जिले में मीटर तो बदले जा रहे हैं परंतु मीटर विभाग द्वारा इसमें खेला जा रहा है लंबा खेल । मिली जानकारी के अनुसार बिजली विभाग द्वारा जिन मीटरों में बिजली यूनिट का बैलेंस ज्यादा होता है उनको बदल कर नया मीटर गोपनीय तरीके से लगाकर बीच में उपभोक्ता से सौदा कर लिया जाता है। इस खेल में मीटर जे ई और मीटर परीक्षक द्वारा खेल लंबे पैमाने पर जनपद मुख्यालय सहित पूरे जिले में ये खेला जा रहा है जबकि इसकी भनक उच्च अधिकारियों को भी नहीं है।

बिजली निगम में मीटर बदलकर रिकार्ड गायब करने का खेल लंबे समय से चल रहा है। हकीकत में मीटर बदलने के बावजूद मीटर चेंज करने के पश्चात मीटर रीडिंग का रिकार्ड में नहीं चढ़ाने के कारण बदले गए मीटरों के रीडिंग का रिकार्ड भी नहीं मिलेगा। रिकार्ड पूरा करने के साथ ही मीटर ढूंढवाकर जब लैब में जांच करवाई जाए तो जनपद मुख्यालय पर कस्बे में मीटर ऐसे बदले गए हैं जिनसे लाखों रुपये से ज्यादा का गड़बड़झाला मिलेगा। विभाग के ऐसे कर्मचारी जो निगम को नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं जिनके ऊपर विभाग के मीटर अनुभाग की जिम्मेदारी है।मगर काफी केस ऐसे हैं जिनमें मीटर ही नहीं मिलेगा।अंदेशा है कि उनको रिकार्ड में जमा ही नहीं करवाया गया।मीटर बदलने पर जूनियर इंजीनियर या इंचार्ज को भरकर रिकार्ड में लगाना होता है। पुराने मीटर की लैब में जांच बाद सात दिन में भरना होता है।

इससे मीटर बदलने की जानकारी और पूरी तरह से बिल निगम में भरने का रिकार्ड रहता है। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है की लंबे समय से तैनात अधिकारी व कर्मचारी जो कि अपनी घुसपैठ बना चुके हैं जिसके कारण यह खेल लंबे पैमाने पर जनपद मुख्यालय पर खेला जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार यह पता चला कि जे ई मीटर के अकबरपुर विद्युत परीक्षण खंड में ही 7 वर्षों तक जेएमटी पद पर कार्यरत रहे और फिर उनका प्रमोशन होने के पश्चात इनको तैनाती भी इसी स्थान पर मिल गई। अवर अभियंता का पद पाने के पश्चात 4 वर्ष पूरे होने के बाद भी जनपद पर उसी स्थान पर जमे रहना यह अपने आप में एक अहम सवाल है।

नाम न छापने की शर्त पर विभाग के कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि साहब की पहुंच ऊपर तक है साहब का कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता जब उनकी इच्छा होगी और जहां जाना चाहेंगे उनका तबादला उसी स्थान पर हो जाएगा शायद यही कारण है की यह मीटर चेंज किए जाने का खेल जो बृहद पैमाने पर खेला जा रहा है। तबादला नीति के तहत जिलों में जो एक ही जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके है उनका स्थानांतरण किए जाएंगे. विभागाध्यक्ष या मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती अवधि को इस अवधि में शामिल नहीं किया जाएगा. मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अधिकतम अवधि सात वर्ष होगी लेकिन सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों का तबादला प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा. अगर मीटर के इस खेल की उच्च स्तरीय जांच बाहरी टीम से करवाई जाए तो शायद करोड़ों रुपए का गड़बड़झाला मिलेगा।

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