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कांवड़ियों की सेवा कर बताया गया पवित्र मास सावन का महत्व

Ibn24×7news महराजगंज

अखिल भारतीय केसरिया हिंदू परिषद अखंड भारत के संस्थापक अध्यक्ष प०प्रकाश चंद हिन्दू , राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ एवं जिले के समस्त कार्यकर्ताओं के द्वारा कावड़ियों की सेवा भक्ति के चासनी में ओतप्रोत होकर की गई जिसमें मुख्य रुप से राष्ट्रीय सलाहकार, राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्य प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ, बड़ोद मंडल अध्यक्ष सोनू त्यागी , गौरव त्यागी , अतुल त्यागी , विकास पंडित , दीपक शर्मा मोहित शर्मा , आर्यन शर्मा एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित होकर भोलेनाथ का नारा लगाते हुए हर पवित्र सावन मास में कांवरियों की सेवा करने का प्रण लिये।

इस बाबत अखिल भारतीय केसरिया हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पंडित प्रकाश चंद हिंदू ने बताया कि सावन महीना शिव भक्तों के लिए सबसे खास महीना होता है।

सावन के महीने में शिव भक्त मंदिरों में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। सावन के महीने में सड़कों पर कांवड़ यात्रा करने वालों का हुजूम निकलता है।

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगा नदी से कांवड़ में गंगाजल भरकर लाते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रावण महीने में भगवान शिव को गंगा जल चढ़ाने से भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती हैं।

कांवड़ यात्रा तीन तरह की होती हैं, डाक कांवड़ यात्रा, दांडी कांवड व खड़ी कांवड़ यात्रा। हिंदुओं में डाक कांवड़ यात्रा सबसे कठिन होती है क्योंकि डाक कांवड़ यात्रा बाकी कांवड़ यात्रा से अलग है। डाक कांवड़ यात्रा लंबी होती है। डाक कांवड़ यात्रा में कांवड़िए शिव के जलाभिषेक तक बिना रुके लगातार चलते रहते हैं और शिव धाम तक की यात्रा एक निश्चित समय में तय करते हैं।

डाक कांवड़ यात्रा में रुका नहीं जाता है। यह लगातार करनी पड़ती है। ऐसा माना जाता है कि कांवड़िए कांवड़ ले लेकर लंबी यात्रा करते हैं, लेकिन बीच में विश्राम भी लेते हैं, लेकिन डाक कांवड़ यात्रा में विश्राम लेने की अनुमति नहीं होती है।

डाक कांवड़ यात्रा में जब एक बार कांवड़ उठा लेते हैं तब बिना स्थान पर पहुंचे हुए रुकते नहीं हैं।

डाक कांवड़ यात्रा को लेकर ऐसी मान्यता है कि यात्रा के दौरान कांवड़िए मूत्र मल भी नहीं त्यागते हैं। अगर नियमों को कोई तोड़ता है तो यह यात्रा खंडित हो जाती है।

डाक कांवड़ के कांवड़िए समूह में चलते हैं लेकिन कई बार कुछ लोग वाहन का इस्तेमाल करते हैं।डाक कांवड़ियों के लिए तामसिक भोजन करने की मनाही होती है और उन्हें सात्विक रहने की सलाह दी जाती है।रिपोर्ट फणीन्द्र कुमार मिश्र।

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