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मेरा अनुकरणीय विद्यालय ( संस्कृति मिश्रा की कलम से)

सिसवा बाजार महराजगंज

मैं अपने विद्यालय की प्रशंसा व उपलब्धियों का वर्णन नहीं कर सकती क्योंकि ये विद्यालय तो अतुलनीय हैं और उपलब्धियों के सागर में स्थित है परन्तु ये ना समझियेगा कि मैं अपने विद्यालय की प्रशंसा कर रही हूँ अपितु मैं अनेक विद्यालयो की जिसमे मेरे प्रिय भाई, बहन व अन्य छात्रों को अपने ज्ञान से सुशोभित करके उन्हें विद्वान बनाते हैं, उनकी प्रशंसा कर रही हूँ।

जनगण को जानकारी देने हेतु मैं संस्कृति मिश्रा कक्षा दस की छात्रा अपने विद्यालय सेन्ट जसेफ्स सीनियर सेकेण्डरी स्कूल सिसवा बाजार महाराजगंज (उत्तर – प्रदेश )के विषय मे अपने कुछ महत्वपूर्ण व शुभ शब्दों द्वारा प्रकाशित कर रही हूं।
मेरा पूजनीय विद्यालय गोरखपूर मंडल में स्थित महाराजगंज जिले में नगर सिसवा बाजार व रायपुर (गाँव) के ब्लॉक रोड के निकट लगभग 25 वर्षों पूर्व स्थापित हुआ था। विद्यालय को प्राचीन काल से ही मंदिर का स्थान दिया जाता रहा है। प्राचीन काल में विद्यार्थी 6, 8 अथवा 11 वर्ष की अवस्थाओं में गुरुकुलो में ले जाए जाते थे और गुरु के पास बैठकर बह्मचारी के रूप में शिक्षा प्राप्त किया करते थे उदाहरण के रूप में हमारे पूज्य परमात्मा श्री कृष्ण ,श्री राम एवं उनके अनुज सामान्य प्रकार से शिक्षा प्राप्त किये थे। मैं उन्हें सादर प्रणाम करती हु परन्तु वर्तमान के विद्यालय , प्राचीन काल के गुरुकुलो से बहुत अलग अवश्य है किन्तु आज भी विद्यालयों को मंदिरों का और अध्यापकों को परमात्मा का स्थान दिया जाता है।
मेरा लोकप्रिय विद्यालय का सौंदर्य सूर्य के प्रकाश के समान सुंदर हैं और मुझे अत्यंत प्रिय है। मेरा विद्यालय शहर की भीड़भाड़ से दूर एकांत स्थल पर है जो प्राचीन काल से ही विद्यालयों के लिए उपयुक्त समझा जाता रहा है, जहाँ पर किसी प्रकार का शोर न हो, क्योंकि पढ़ाई के लिए शांति की अत्यंत आवश्यता होती है। मेरा प्रिय विद्यालय बहुत बड़ी जगह में फैला हुआ है, इसके चारों ओर ऊँची ऊंची दीवारें हैं । मेरे विशाल विद्यालय की इमारत तीन मंजिला है जो अंग्रेजी के L आकार में निर्मित की गई हैं। इस विद्यालय में 60 कमरे हैं और प्रत्येक कमरे में हवादार खिड़कियाँ व चार-चार पंखे है। इन कमरों की परिचायिका द्वारा प्रत्येक दिन सफाई की जाती है जिससे हम स्वच्छ भारत व स्वच्छ माहौल में पढ़ाई कर पाते है क्योंकि स्वच्छ भारत तो स्वस्थ भारत।मेरे विद्यालय में कक्षा नर्सरी से बारह तक की पढाई होती है । मेरे विद्यालय के मध्य में अत्यंत बड़ा व सुंदर मैदान है जिसमें हम सभी विद्यार्थी खेल कूद का आनंद लेते हैं यही पर हमारा प्रार्थना स्थल है जहाँ पर हम सुबह माता सरस्वती की प्रार्थना करते हैं और अपनेअच्छे दिन की शुरुआत करते हैं। विद्यालय के मैदान के चारों ओर बड़े-बड़े वृछ व गुलाब के कोमल पुष्प लगे हुए है और छोटी-छोटी घास लगी हुई हैं । मेरे वायु जितनी शीतल विद्यालय में हिन्दी विषय को हिंदी और अन्य विषयों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया जाता है। मेरे कुशल विद्यालय में अतुलनीय जीवन अर्थात् जल की व्यवस्था उपलब्ध है। मेरे विद्यालय के दोनों तरफ छात्र
एवं छात्राओंं के लिए भिन्न-भिन्न 20 स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था है। मेरे चंद्र के समान सुंदर विद्यालय मे 100 कंप्यूटर यंत्रों का एक बड़ा व सुंदर कक्ष है, जिसमें प्रत्येक दिन हमारी एक कक्षा कंप्यूटर से संबंधित होती है। मेरे वैभवशाली विद्यालय में अतुलनिय शिक्षको के बैठने के लिए दो स्टॉफ रूम की व्यवस्था भी है और प्रत्येक कक्षा में एक बड़ा व व्हाइट बोर्ड का प्रयोग किया जाता है जिसमें एक-एक कूड़ादान भी उपस्थित है। अनुशासन प्रत्येक व्यक्ति को सर्वश्रेष्ट बनाता है और मेरे कुशल विद्यालय के सभी छात्र व छात्राए अनुसाशन को प्रथम स्थान देते है कारण यह कि मेरे आदरणिय प्रधानाचार्य माननिय O.A Joseph व अंग्रेजी प्रवक्ता फणीन्द्र कुमार मिश्र अनुशासन को सर्वश्रेष्ट स्थान प्रदान करते है ,हमारे विलक्षण विद्यालय में प्रत्येक माह कोई न कोई प्रतियोगिता होती ही रहती है, जिसमें चित्र, वाद-विवाद, कविताएँ, योगा व खेल कूद आदि होती हैं जिसमें सभी विद्यार्थी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और उत्तीर्ण होकर वे पुरस्कारों से सम्मानित किये जाते है।

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