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महारानी वैष्णो देवी मंदिर में चौथे नवरात्रि पर हुई मां कुष्मांडा की पूजा

 

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:महारानी वैष्णोदेवी मंदिर में नवरात्रों के चौथे दिन मां कुष्मांडा की भव्य पूजा अर्चना की गई। प्रात कालीन आरती व हवन यज्ञ में माता के समक्ष पूजा अर्चना कर भक्तों ने अपनी हाजिरी लगाई।

इस अवसर पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने हवन यज्ञ का शुभारंभ करवाया और भक्तों को नवरात्रों की शुभकामनाएं दी। इस अवसर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राजकुमार वोहरा,कोषाध्यक्ष,राजन मुथरेजा,गोल्ड मेडलिस्ट कंचन लखानी,विनोद पांडे,आर के बत्रा,आदि गुर्जर,राहुल मक्कड़,प्रताप भाटिया व फकीरचंद कथूरिया ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई और हवन में आहुति दी। उन्होंने मां कुष्मांडा की विशेष पूजा अर्चना में भी हिस्सा लिया तथा अपनी अरदास लगाई।

मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने आए हुए अतिथियों को माता की चुनरी भेंट कर प्रसाद दिया। इस अवसर पर भाटिया ने बताया कि नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद,हल्की हंसी के द्वारा अड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी,चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था,तब इसी देवी ने अपने ईष्ट हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी।

इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। इस देवी की आठ भुजाएं हैं,इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल,धनुष,बाण, कमल-पुष्प,अमृतपूर्ण कलश,चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्य लोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है।

इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु,यश,बल और आरोग्य प्राप्त होता है।

ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंत इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए।

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