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श्री महारानी वैष्णो देवी मंदिर में छठे नवरात्रि पर हुई माँ कात्यानी की पूजा

 

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:महारानी वैष्णोदेवी मंदिर में नवरात्रों के छठे दिन मां कात्यानी की भव्य पूजा अर्चना की गई। प्रातकालीन आरती व हवन यज्ञ में माता के समक्ष पूजा अर्चना कर भक्तों ने अपनी हाजिरी लगाई। इस अवसर पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने हवन यज्ञ का शुभारंभ करवाया और भक्तों को नवरात्रों की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उद्योगपति आर के बत्रा,मंदिर संस्थान के अध्यक्ष प्रताप भाटिया,अमिताभ गुलाटी,नवीन दुबे,कैलाश एवं अजय ने मां के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई और पूजा अर्चना में शामिल होकर मां कात्यानी का आशीर्वाद लिया। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने आए हुए सभी अतिथियों को माता रानी की चुनरी एवं प्रसाद भेंट किया।इस अवसर पर भाटिया ने भक्तों को मां कात्यानी की महिमा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ,धर्म,काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।

उसके रोग,शोक,संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसीलिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ,धर्म,काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग,शोक,संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।

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