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जब माईनर मा न होय पानी, तो कैसे होय किसानी

 

संवाददाता मुदस्सिर हुसैन IBN NEWS मवई अयोध्या

✍️माइनर से हज़ारों बीघा खेतो को किया जा सकता है सिंचित

✍️ बीते कई सालो से नहीं पहुंचा इस माइनर में पानी

✍️ इस माइनर की सफाई को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया,नहीं हुई टेल तक सफाई

26/07/2021 मवई अयोध्या – किसानों की भलाई व बेहतरी को सरकार की शीघ्र प्राथमिकता बताने में प्रदेश सरकार के मुखिया नहीं अथाते है। कृषकों की ज्वलंत समस्याओं से रूबरू होकर उनके त्वरित निदान के लिए प्रशासनिक अधिकारी तक सरकारी लाव लश्कर लेकर गांवो का भ्रमण भी कर आते है। फिर भी किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का पता लगाने गए यह लाल बत्ती वाले अफसर उनकी नब्ज पर हाथ ही नहीं रख सके।

इलाज तो दूर की बात है। कुछ ऐसे ही हालात से जूझ रहे हैं ब्लॉक मवई के किसान। सरकार किसानों का हितेषी होने का लाख दावा करे,लेकिन वर्षों से उनकी मांगों को आश्वासनों में उलझा कर बहला दिया जाता है। करीब दर्जन भर गांवो की सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि की जला पूर्ति कराने की मंशा से खुदाई गई शारदा सहायक नहर से छोटी माइनर इसकी जीती जागती मिसाल है। आपको बता दे कि इस माइनर में कभी पानी नहीं रहता। किसानों के लिए यह माईनर वरदान के बजाए अभिशाप बन कर रह गई, जिसकी वजह से गरीब व कमजोर तबके के काश्तकारों के लिए खेती सुहावने सपने बन कर रह गई। अपने परिवार का पालन पोषड बड़ा ही कष्ट कारी बनता जा रहा है। जाड़े की ठिठूरन व गर्मी की तपिश में बच्चो व महिलाओं के साथ अथक परिश्रम करने के बाद भी तंग हाली उनका नसीब बन कर रह गई।

 

खेतो की सिंचाई के लिए नहर से पानी नदारद है। प्राइवेट ट्यूबवेल मालिकों की महंगी सिंचाई दर उनके सामर्थ्य से बाहर है। जब किसानों का हाथ खाली है तो भला कैसे खेतो में हरियाली आएगी। और सरकार का किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का सपना कैसे पूरा होगा। फिलहाल प्रशासन व सबंध विभाग की उदासीनता पूर्ण कार्य शेली से तो यही लगता है कि बड़ी कठिन डगर किसानों की।दिलचस्प बात यह है कि जनसमस्याओं का जायजा लेने के लिए तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों पर जिला के आला अधिकारी भी शरीक होते रहते हैं।

 

फिर भी कृषकों की इस मूल भूत आवश्यकता से वे अब तक नावाकिफ बने हुए हैं। यह किसान की विडंबना है कि या प्रशासन की अकर्मण्यता व गांवो के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की जनता की समस्याओं से अरुचि का नतीजा। वजह कुछ भी हो लेकिन इस समय ग्राम कोटवा, रानेपुर, सलारपुर, मस्तापुर,नेवरा, संद्वा, आदि के सैकड़ों किसान जहां अवर्षण का दंश झेल रहे हैं तो वहीं प्रशासन भी उनकी मजबूरी का उपहास उड़ा रहा है। सिंचाई की समस्या तो प्रमुख है ही। अब देखना है कि जय जवान जय किसान का नारा कब साकार होगा। यह आने वाला समय ही बताएगा।

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