टीम आईबीएन न्यूज
ब्यूरो रिपोर्ट
वाराणसी। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली वाराणसी पुलिस पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला एक महिला पत्रकार राधिका तिवारी से जुड़ा है, जिनके साथ जानलेवा हमला और लज्जा भंग करने की कोशिश की गई। यह घटना न केवल पत्रकारिता जगत को हिला देने वाली है, बल्कि कानून व्यवस्था की पोल भी खोलती है।
सूत्रों के मुताबिक पीड़िता पत्रकार राधिका तिवारी ने घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंपी, इसके बावजूद मिर्जामुराद थाना पुलिस ने आरोपियों को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार करने के बजाय मात्र 151 (शांति भंग) की कार्रवाई कर चालान कर दिया।
जब घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, तो हत्या के प्रयास और महिला की लज्जा भंग करने जैसी गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं? क्या मिर्जामुराद थाना दोषियों को बचाने में लगा हुआ है?पीड़िता का कहना है कि उन्होंने SHO मिर्जामुराद से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, लेकिन थाना प्रशासन की कार्यवाही बेहद ढुलमुल और संदिग्ध नजर आई।
विडंबना देखिए—
इसी महिला पत्रकार राधिका तिवारी* को कुछ समय पहले पुलिस कमिश्नर वाराणसी* ने उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुलिस लाइन में सम्मानित और पुरस्कृत किया था।लेकिन आज वही पत्रकार, पुलिस की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रही हैं।
यह घटना मिशन शक्ति जैसे अभियान की साख पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है।
एक तरफ पुलिसिंग नारी सुरक्षा, नारी सम्मान” का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ एक सम्मानित महिला पत्रकार की सुरक्षा में असफल नजर आती है।
जनता और पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि —
घटना की निष्पक्ष जांच हो,
दोषियों पर IPC की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
मिर्जामुराद थाना की भूमिका की जांच की जाए
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि
“क्या महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के दावे सिर्फ मंचों और अभियानों तक सीमित हैं?”