Ibn24x7news रिपोर्ट शरद मिश्र मडिहान मिर्जापुर
बगहवा जंगल मे ट्रैक्टर ट्राली से पत्थर उतार कर वापस लौटते समय शुक्रवार की रात मजदूर की कुचलकर हुई मौत के मामले में पीड़ित पत्नी को पैतीस हजार रुपये में संतोष करना पड़ा।गला फंसता देख पत्थर माफिया स्थानीय पुलिस के सहारे समझौता लिखवा लिया।जब कि तीन भाइयों में बड़ा भाई पैसे से संतुष्ट नही था।वह चालक के खिलाफ कार्यवायी चाहता था।
किन्तु मृतक की पत्नी ठीकेदार व पुलिस के बीच एक बन्द कमरे में घंटो गुप्तगू चली।समझौता कैसे हुआ अब मृतक की पत्नी मुह खोलने को तैयार नही।
यह कोई नया मामला नही है पत्थर खदानों पर आए दिन घटनाएं होती रहती है।मध्यप्रदेश,झारखंड व बिहार प्रान्त के पत्थर खनन में सैकड़ो मजदूर बंधक बनाए गये हैं।2016 में24जून को देवरी के एक खदान में बिस्फोट करते समय तीन मजदूरों की मौत हो गयी थी।कई घायल हुए थे।संबंधित बिभाग को कानो कान खबर नही हुयी।घटना का खुलासा न हो ठिकाने लगाने के लिए लाशों से लदी डम्फर थाने के सामने से निकल गयी।जब कि बाईक चेकिंग की जा रही थी।डम्फर चालक ने एक शव को ददरा में गिर दिया,दूसरा चुनार थाना क्षेत्र के चचेरी मोड़ पर गिराकर भागने लगा।पत्रकारों की सूचना पर जगी पुलिस ने बाद में चालक समेत डम्फर को हिरासत में लेकर कार्यवायी की।सात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर क्रेशर प्लांट बन्द करा दिए गए थे।गरीब दलित मजदूर श्रमिकों की मौत की कीमत कौड़ियों के भाव सुलहा कराये जाते हैं।न जाने कितने जंगली जानवरों की तरह दफन कर दिए जाते हैं।
रिपोर्टर शरद मिश्र
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