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गांधी जी के विचारों को आज के संदर्भ में लागू करने की जरूरत

 

रिपोर्ट ब्यूरो गोरखपुर

गोरखपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार और शिक्षा संकाय, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय तथा शिक्षाशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय व्यवसायिक शिक्षा, नई तालिम, प्रयोगात्मक शिक्षा विषयक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक के रूप मे महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजीव कुमार शर्मा एव प्रति कुलपति आचार्य जी गोपाल रेड्डी एव महात्मा गांधी राष्टीय ग्रामीण शिक्षा परिषद, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के अध्यक्ष डॉ प्रसन्ना कुमार एव शिक्षा संकाय, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष आचार्य आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि आज हमारी जरुरत है कि हम गांधी के शैक्षिक विचारों को आज के संदर्भ में लागू करे जिसकी बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अपने सिद्धांतों में कर रही है|
कार्यक्रम के निर्देशक विभागाध्यक्ष आचार्य शोभा गौर समन्वयक सहायक आचार्य डॉ मीतू सिंह, सह समन्वयक सहायक आचार्य डॉ स्वर्णिमा सिंह कार्यक्रम के संयोजक श्रीमान अंगद कुमार सिंह सह संयोजक आस्तिक कुमार मिश्र शोध छात्र शिक्षा संकाय, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय थे| कार्यक्रम के औपचारिक शुरुवात सहायक आचार्य शिक्षा संकाय, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ मनीषा रानी के स्वागत वक्तव्य के द्वारा प्रारम्भ हुआ तत्पश्चात डॉ प्रसन्ना कुमार का उद्बोधन प्राप्त हुआ जिसमे उन्होंने गांधी के शैक्षिक विचारों के आज के संदर्भ में कैसे प्राप्त किया जाए इसपर प्रकाश डाला। आगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ राज शरण शाही शिक्षा संकाय, बाबासाहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ का उद्बोधन प्राप्त हुआ | उन्होंने कहा कि भारत के त्रय परंपरा को शिक्षा से जोड़ते हुए कार्य अनुभव शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत हैं | कार्यक्रम के अगली कड़ी मे कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिक्षा संकाय, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र श्रीमान गणेश शुक्ल का उद्बोधन वेंटल एक्शन प्लान पर हुआ उन्होंने कक्षा कक्ष प्रक्रिया मे कैसे गांधी के विचारों लागू करे इस पर उन्होंने विस्तृत समझ साझा किए साथ ही साथ गांधी के व्यवसायिक शिक्षा, आत्मनिर्भरता , स्वास्थ्य एव स्वच्छता तथा सामुदायिक सहभागिता को कैसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, इस पर मुख्य आधारित व्याख्यान दिए | तत्पश्चात प्रतिभागियों से प्रश्नोत्तरी किया गया| कार्यक्रम के अंत मे धन्यवाद डॉ मीतू सिंह के द्वारा दिया गया | इस कार्यक्रम में सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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