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नई शिक्षा नीति की आत्मा पूरी तरह से भारतीय- प्रो सफाई प्रकाश मणि त्रिपाठी

रिपोर्ट योगेश श्रीवास्तव

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 40 में दीक्षांत सप्ताह समारोह के अंतर्गत शनिवार को कला संकाय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से शिक्षा संस्कृति और संस्कार विषयक व्याख्यान का आयोजन संवाद भवन में किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमर कंटक के कुलपति प्रो श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि
मातृशक्ति, मातृ संस्था और मातृभूमि आजीविका की मातृ संस्था होती हैं। शिक्षा संस्कृति और संस्कार इसके आधार हैं। शिक्षा कभी आपको झुकने नहीं देती संस्कृति कभी पराजित नहीं होने देती और संस्कार आप को गिरने नहीं देते हैं। यह तीनों मिलकर शिक्षा का ताना-बाना बनाते हैं। नई शिक्षा नीति की आत्मा भारतीय है जो हमें पुरातन से अधुनातन तक पहुंचाने की विशेषता रखती है । कोरोना ने शिक्षा के माहौल को बदला है शिक्षक और विद्यार्थी अब केवल कक्षा तक सिमट कर नहीं रह गए हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ चुके हैं इसलिए सतर्कता और सावधानी बरतें। ज्ञान के युग में इसकी भी अहमियत बढ़ गई है। शिक्षा तब फलित होती है जब संस्कृति पोषित होती है । संस्कृति शिखरोन्मुख बनाती है। पश्चिम की संस्कृति टकराव की बात करती हैं बाहर से जो आया उसे हमारी संस्कृति ने समावेशित किया। संस्कृति संस्कार से आती है और संस्कार पीढ़ियों से आते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा संकाय विभाग की अधिष्ठाता प्रोसेसर शोभा गौड़ ने किया। स्वागत भाषण व्याख्यान की संयोजक और अधिष्ठाता कला संकाय प्रो नंदिता आईपी सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति का लक्ष्य शिक्षा,संस्कृति और संस्कार को बढ़ावा देना है। शिक्षा के विस्तृत आयामों में संस्कृति को कैसे जोड़े यही इसका मूल है। संस्कृति दशकों में निर्मित हुई है यह एक अनुभूति है जो नित्य कार्यों में को महसूस करती है और जब इसे बांटा जाता है तो फैलती है। आभार ज्ञापन राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रूसी राम महानंदा ने किया और संचालन की जिम्मेदारी डॉक्टर अमित उपाध्याय ने उठाई। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप जलाकर किया। तत्पश्चात संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत की प्रस्तुति दी।

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