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रिपोर्ट सुभाष यादव

खुखुन्दू, देवरिया। सावन के पावन महीने में मठिया शिव मंदिर, खुखुन्दू में आयोजित शिव महापुराण कथा के षष्ठम दिवस श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत रहा। कथा व्यास पं. राघवेन्द्र शास्त्री जी ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि श्रद्धा और विश्वास ही भगवान शिव एवं माता पार्वती के स्वरूप हैं।
कथा के दौरान पं. राघवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि अपने पूर्व जन्म में माता सती ने मृत्यु के समय भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने का संकल्प लिया था। इसी वरदान के फलस्वरूप उन्होंने हिमालय के घर में माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उनका नाम पार्वती पड़ा। माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कामना की।
उन्होंने आगे बताया कि तारकासुर के अत्याचारों से देवता और समस्त लोक परेशान थे। तारकासुर का वध भगवान शिव के पुत्र के हाथों होना निश्चित था। इसी कारण देवताओं को शिव-पार्वती विवाह और उनके पुत्र के जन्म की प्रतीक्षा थी।
इसी क्रम में खुखुन्दू जैन मंदिर से मठिया शिव मंदिर तक भव्य शिव बारात यात्रा निकाली गई। शिव बारात में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रास्ते भर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
मठिया शिव मंदिर पहुंचने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का आयोजन किया गया। सुंदर-सुंदर भजनों एवं विवाह गीतों के बीच शिव-विवाह की रस्में संपन्न हुईं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्तों ने भगवान शिव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शिव बारात और शिव विवाह कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरा मंदिर परिसर एवं आसपास का क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।