Ibn news Team DEORIA
दिनेश गुप्ता

देवरिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के इक्विटी नियमों को लेकर चल रही बहस का असर भी राजनीतिक चर्चाओं में दिखाई देने लगा है। पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र में दलित, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के लोगों के भाजपा से जुड़ने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।
UGC के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना और समानता एवं समावेशन को बढ़ावा देना बताया गया है। हालांकि इन नियमों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि पथरदेवा सहित पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में पिछड़े, दलित और अन्य वंचित वर्गों के बीच भाजपा के प्रति राजनीतिक आकर्षण बढ़ रहा है। वहीं, सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों और समूहों द्वारा UGC नियमों को लेकर आपत्ति जताए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं।
इसी के बीच पथरदेवा की राजनीति में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि UGC विवाद का 2027 के चुनावी समीकरणों पर कितना प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का मानना है कि यदि भाजपा दलित, पिछड़ा, अनुसूचित और अल्पसंख्यक वर्ग में अपनी पहुंच बढ़ाती है तो क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है। मुस्लिम मतदाताओं के बड़े स्तर पर भाजपा के पक्ष में समर्थन देने की चर्चा सुनी जा रही है।