बीगोद– बुधवार को महिलाओं ने ऋषि पंचमी पर सप्त ऋषि श्रद्धा, कृतज्ञता ,स्मरण करते पूजा अर्चना कर आरोग्य, सुख समृद्धि, पूर्व मे किये दोष निवारण को लेकर पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना। अलसुबह महिलाओं ने सरोवर में स्नान कर सूर्य देव को जल अपिर्त कर, दान- पुण्य करते कबतूरो को दाना, मछलियों को आटा, गायो को हरा चारा डालकर दान-पुण्य किया। फिर महिलाएं सज- छज हल्के पीले रंग वस्त्र धारण कर, चुनरिया साडी पहन श्रृंगार कर मन्दिर व घरो मे महिलाओं ने सफाई कर एक चौकी पर लाल- पीला वस्त्र बिछाकर सप्त ऋषि की तस्वीर रखकर पुष्प माला अर्पित कर जलभर, कलश रखकर धूप, दीप, फल, रोली, लच्छा, अक्षत, वस्त्र, नारयिल, पचामृत , पीले- फूल और मिठाई अपिर्त कर पूजा अर्चना आरती कर सप्त ऋषि की कथा सुनी।
महिलाओं ने व्रत, उपवास रखकर बडो से आशीर्वाद लिया। ऋषि पंचमी भद्र पद शुक्ला व हरितालिका तीज के दो दिन बाद और गणेश चतुर्थी के एक दिन के बाद मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को जन्म मरण के चक्र से मुक्ति पा लेता है।
(फोटो कैप्शन–1- मन्दिर मे महिलाएं सप्त ऋषि जी की पूजा अर्चना करते हैं
2- सप्त ऋषि की कथा सुनती महिलाएं)
फोटो प्रमोद कुमार गर्ग