वो फिर क्यों तिरंगा फहराएँ जिनको भारत से प्यार न हो ।
जिनके मन में भारत के प्रति प्रेम न हो संस्कार न हो ।।
भारत के टुकड़े करने को,सपना दिल में जो संजोये हों ।
दुश्मन की जय-जयकार करें, उनका क्यों हो सत्कार यहाँ ।।
रहते हैं यहाँ खाते हैं यहाँ और गाना दुश्मन का गाते ।
उन देशद्रोहियों के पीछे पड़ते हैं नहीं क्यूं लोग यहाँ ।।
भारत माता को दे गाली,संस्कृति हमारी नष्ट करें ।
ऐसे सपोंले लोगों को मिलते हैं पालनहार यहाँ ।।
धारा-19 का हवाला दे,अभिव्यक्ति की आज़ादी पायी ।
उस आज़ादी के नामों पर,करते हैं प्रदर्शन लोग यहाँ ।।
जब काश्मीर में धारा-370 थी हटाई गयी ।
उसके भी विरोधी धरनों पर बैठे मिलते हैं लोग यहाँ ।।
एक नागरिक कानून जबसे वजूद में है आया ।
शाहीन बाग जैसे धरने दिल्ली में करते लोग यहाँ ।।
जब पाकिस्तान पे हमला हो,भारत की सेना झूँठी है ।
ऐसा कहते नेता अपने,दुश्मन के साथी लोग यहाँ ।।
जब चीन से कर गुत्थमगुत्था,सेना ने उन्हें भगाया था ।
तब भी भारत की सेना पर,करते हैं शक फिर लोग यहाँ ।।
खुल चुकी तुम्हारी पोल है सब,अब भारतवासी जाग चुके ।
इस देश में छुपे गद्दारों की,असलियत सभी पहचान चुके ।।
तुम सपना देखो बस कि भारत होगा फिर खंड-खंड ।
वो दिन भी है अब दूर नहीं जब भारत होगा फिर अखंड ।।
एक-एक गद्दारों का तब जनता लेगी फिर हिसाब ।
वो राष्ट्रद्रोही फिर नेता हो या फिर हो अफजल,कसाब ।।
जो भारत की जय न बोले,उसकी यहाँ अब जगह नहीं ।
जो वंदेमातरम् गाने से शर्माये उसकी सजा नहीं ।।
जिसको भारत में रहना है,जन-गण उसे गाना होगा ।
करके प्रणाम तिरंगे को,फिर शीश भी झुकाना होगा ।।
जब तक वो भारत माता की,खुल करके न जयकार करें ।
तब तक वो भारतवासी हैं,इसको न हम स्वीकार करें ।।
कह रहा “अनु” ये बारबार,भारत माता की जय जय जय ।
हो जिसको ये मंजूर नहीं,उसका फिर हम प्रतिकार करें ।।
वो फिर क्यों तिरंगा फहराएँ जिनको भारत से प्यार न हो ।
जिनके मन में भारत के प्रति प्रेम न हो संस्कार न हो ।।
लेखक- पं. अनुराग मिश्र “अनु”
आध्यात्मिक लेखक व कवि