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महाशिवरात्रि के दिन जनपद महाराजगंज के विभिन्न शिव मंदिरों में पूजा के किये उमड़ा भक्तो का अपार जन सैलाब

Ibn24×7news
सिसवा बाजार महराजगंज
अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का। महाशिवरात्रि के पवित्र पावन अवसर पर जनपद के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालु -भक्तों का दिनभर तांता लगा रहा और सभी श्रद्धालु सदा शिव ,भगवान शंकर के नारे लगाते हुए जल के साथ भांग ,धतूर, बैर , गन्ना इत्यादि शिवलिंग पर अर्पण कर रहे थे तथा अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार दान देकर पूण्य के भागी बन रहे रहे थे।

बताते चलें कि मिनी बैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध इटहिया मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। सिसवा बाजार ब्लाक के अंतर्गत ग्राम सभा हरपुर घिवहां में बौरहवा बाबा के नाम से प्रसिद्ध मंदिर पर तो भक्तों का भारी जनसैलाब देखा गया तथा यहां के मेले में भक्तों की भारी भीड़ रही जिससे मेन रोड कुछ समय के लिए बाधित रहा लेकिन पुलिस -प्रशासन के प्रयास से भक्तों को एक किनारे कर रास्ता बनाया गया। ग्राम सभा हरपुर महंत शिव मंदिर पर आज महाशिवरात्रि के दिन पूजा अर्चना करने के लिए दूर-दूर श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा और भव्य मेले का भी आयोजन किया गया।

इस बाबत पुजारी और मंदिर प्रबंधक का कहना है कि इस साल बहुत बड़ा मेला लगा था जिसमें दूरदराज से भी व्यापारी और श्रद्धालु गणों का आना देखा गया जिससे इस साल का मेला बहुत ही भव्य और सुंदर दिखा। शिवरात्रि यूं तो हर महीने आता जिसमें भक्तगण रुद्राभिषेक करवाते हैं और अपने घर के सारे कष्टों को दूर करते हैं लेकिन महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार ही आता है और इस पर्व को पूरे देश में धूमधाम से मनाने के साथ भक्त गण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अपने- अपने तरीके से पूजा- अर्चना करते हैं। महाशिवरात्रि पर्व का महत्व इसलिए है क्योंकि यह शिव और शक्ति के मिलन की रात है जिस पर सृष्टि की आधारशिला टिकी हुई है। इस दिन सभी शिव मंदिरों में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक चलता है और भक्त गण इस दिन व्रत भी रखते हैं लेकिन आपको क्या आपको पता है महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवजी पहली बार प्रकट हुए थेऔर उनका प्राकट्य ज्योतिर्लिंग यानी (अग्नि ) शिवलिंग के रूप में था जो ऐसा शिवलिंग था जिसका ना तो आदि था और न ही अंत था। बताया जाता है कि शिवलिंग का पता लगाने हेतु सृष्टि रचयिता ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग को खोजने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे लेकिन वह सफल नहीं हो सके क्योंकि वह शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग तक पहुंच ही नहीं पाए। दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह का रूप लेकर शिवलिंग के आधार ढूंढ रहे थे लेकिन उन्हें भी आधार नहीं मिला। अतः थक हार कर सभी ने भगवान भोलेनाथ की स्तुति की फिर शिव शक्ति का मिलन हुआ और इसी मिलन को हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह भी मानता है कि जो इस दिन सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ और जगत जननी जगदंबा मां पार्वती से कुछ भी मांगता है वह निराश नहीं होता है ।जय भोलेनाथ ,हर हर महादेव:रिपोर्ट फणीन्द्र कुमार मिश्र

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