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सिसवा बाजार महराजगंज
महाराजगंज के बहुचर्चित सिसवा विधानसभा में जहाँ भाजपा के उम्मीदवार प्रेम सागर पटेल जिनके प्रचार प्रसार के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी जी भी आ चुके है हालाकि ये बात दिगर है कि न्यूज़ चैनलों में जनता के द्वारा पटेल को कभी अच्छा तो कभी कुछ लोगों के गुस्से का सामना भी करना पड़ रहा है लेकिन योगी जी का प्रभाव पड़ना तय नजर आ रहा है क्योकि योगी जी हैं तो सब संभव है इसलिए ये
ये विजय श्री के कितने करीब हैं आप सहज अनुमान लगा सकते है।अब बात करते हैं इनके विरोध में सपा से सपा सरकार में मंत्री रहे कद्दावर नेता सुशील टिबडेवाल जिनके प्रचार प्रसार में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,पूर्व सांसद व युवाओं के चहेते धर्मेंद्र यादव,सिसवा बाजार से सपा के कद्दावर नेता प्रमोद शर्मा जो अपने मृदुभाषी स्वभाव से जनता के दिलों में राज करते है तथा सिसवा नगर पालिका से अध्यक्ष पद के भावी विजेता प्रत्याशी भी हैं तथा भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव सहित तमाम अन्य हस्तियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है,इनके साथ व्यवसायी वर्ग,मुसहर वर्ग,यादव,कुछ ब्राह्मण,अध्यापक वर्ग,मुस्लिम वर्ग व कुछ अन्य वर्ग के जातियों का पुरजोर समर्थन है लेकिन औरतो का प्रचंड समूह योगी जी के साथ है ।बसपा से धीरेन्द्र प्रताप सिंह जो कुछ समय पूर्व भाजपा में थे और यह कहना गलत न होगा कि शायद सिसवा विधानसभा का कोई गांव या चौराहा न हो जहाँ इनका भाजपा वाला पोस्टर न लगा हो।इनके साथ युवा वर्ग,ठाकुर ,हरिजन, पासी,कुछ ब्राह्मण व अन्य वर्ग का समर्थन प्राप्त है ।विदित रहे भाजपा के ब्लॉक प्रमुख कोदई निसाद को जिताने में इनकी मुख्य भूमिका रही है जो इस कम उम्र में ही गागर में सागर भर रहे हैं। कांग्रेस से जहाँ राजू गुप्ता मैदान में हैं वहीं भाजपा से टिकट न मिलने पर बागी प्रत्यासी अजय कुमार श्रीवास्तव है जो 20 वर्षो से भाजपा में जुड़े थे।सूत्रो की माने तो अभी भी भाजपा के तमाम कार्यकर्ता व भाजपा के बड़े नेताओं से इनकी साठ -गांठ बनी हुयी है बताने की जरूरत नहीं है इनके पास कहाँ- कहा का समर्थन प्राप्त है क्योंकि वो जमाना बीत गया कि जनता बोलती है,अब जनता करती है।अब बारी है उस प्रत्यासी की जिसने सपा से टिकट न मिलने पर पिछले तीन बार के हार के बाद भी लगातार जनता के बीच अपनी उपस्थिति के बल पर बागी प्रत्याशी के रूप में फिर से निर्दलीय ताल ठोक रखी है, जी हाँ ई0 आर के मिश्रा जिन्होंने मुकाबले को अब चतुष्कोणीय बना दिया है। विदित रहे कि सिसवा विधानसभा में कुल 366103 मतदाता हैं जिनमें 197299 पुरुष,168796 महिला तथा 8 वोटर थर्ड जेंडर के हैं। इस सीट पर जहाँ बीजेपी ने कई बार कब्जा जमाया है वहीं सपा और बसपा ने भी इस सीट पर जीत हासिल की है पर आज का परिदृश्य थोड़ा अलग है क्योकि परिवर्तन संसार का नियम है ।सिसवा विधानसभा में जनता, शिक्षाविद व राजनीतिज्ञ ब्राह्मण वोट को निर्णायक वोट मान रहे है तथा ई0आर के मिश्रा अकेले ब्राह्मण प्रत्याशी हैं। ब्राह्मणों के रुझान को देखते हुए एक बड़े फेरबदल से इन्कार भी नहीं किया जा सकता है क्योंकि पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आर के मिश्रा 39215 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे हैं जिसमें उन्हें ब्राह्मण, क्षत्रिय, व्यापारी, मुस्लिम, बैकवर्ड,एस सी और अन्य तमाम विरादरी का वोट मिला हुआ है। ब्राह्मण ओट लगभग 75000 है जो इस बार के चुनाव में निर्णायक भूमिका का कार्य कर सकती है लेकिन ब्राह्मण एकमत हो ही नही सकते है ज्यादातर भाजपा के साथ ही है। फिलहाल जनता की मानें, सूत्रों को पहचाने व अपने सही अधिकार को जाने तो ग्राउंड रिपोर्ट में जो परिदृश्य दिख रहा है उससे ऐसा लग रहा है कि सिसवा विधानसभा में इतिहास दुहराहर लिखने की तैयारी जनता में चल रही है क्योंकि सिसवा को जनता तहसील बनता देखना चाह रही है जो भाजपा ही कर सकती है अब तो समझ मे आ गया होगा कि दुबारा फिर से जीतकर पटेल जी ही आ रहे है।रिपोर्ट:फणीन्द्र कुमार मिश्र(लेख आकड़ो, तथ्यों ,जातिगत चुनावी समीकरण व जनता के राय पर आधारित)