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हिंदी दिवस पर प्रख्यात कवियों ने डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के सभागार को किया गुंजायमान

 

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी विभाग ने हिंदी सप्ताह समारोह के अंतर्गत एक कवि सम्मेलन व काव्य संग्रह ’व्हिस्पर्स ऑफ द माइंड’का लोकार्पण किया। प्रख्यात कवियों में यशदीप कौशिक,कुलदीप बृजवासी,अमरपाल रायबरेली, पुनीत पांचाल,आदि ने विभिन्न रसों से ओत-प्रोत कविताएं सुनाकर सभागार में उपस्थित सभी विशिष्टजनों व छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया |

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को हिंदी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि,उसकी उत्कृष्टता,सरलता,सहजता व राष्ट्र निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराना रहा | इस अवसर पर डीएवी महाविद्यालय प्रबंधकर्ता समिति, नई दिल्ली,कोषाध्यक्ष डॉ.धर्मवीर सेठी मुख्य अतिथि व जेसी बोस. विज्ञान एवं तकनीकि विश्वविद्यालय फरीदाबाद,की अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.दिव्या ज्योती विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुई। डीएवी महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ.सविता भगत के कुशल नेतृत्व में काव्य संग्रह व्हिस्पर्स ऑफ द माइंड’का लोकार्पण किया गया |

इस काव्य संग्रह की डॉ.सविता भगत मुख्य संपादक भी हैं | महाविद्यालय से सेवानिवृत्त डॉ. अरुण भगत,ममता कुमारी व डॉ. प्रियंका अंगिरस ने इस काव्य संग्रह का संपादन किया | इस काव्य संग्रह में देशभर से विभिन्न महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों की लगभग सौ कविताओं को संकलित किया गया है। पुस्तक के संपादक डॉ.अरुण भगत ने उन सभी लेखकों के प्रति आभार प्रकट किया जिन्होंने इस काव्य संग्रह में अपना योगदान दिया।

कवि यशदीप कौशिक ने ना केवल अपनी कविताओं से रोमांचित किया बल्कि इस कवि मंडली के संचालक भी रहे। कुलदीप बृजवासी ने जहां अपनी कविताओं में सौंदर्य व हास्य रस को प्रकट किया वहीं पुनीत पांचाल ने वीर रस से भरी राष्ट्रभक्ति की कविताओं को सुनाया। कवि अमरपाल रायबरेली ने भक्तिरस से ओत-प्रोत मीरा की कृष्ण भक्ति को सुनाकर दर्शकों को अभिभूत कर दिया।

विशिष्ट वक्तव्य में प्रोफेसर दिव्या ज्योति ने जल संरक्षण के महत्त्व को प्रकट करती अपनी कविता का मंचन किया। मुख्य अतिथि डॉ.धर्मवीर सेठी ने अपने वक्तव्य में महर्षि दयानंद सरस्वती की पुस्तक ’सत्यार्थ प्रकाश’के प्रति अपने भाव प्रकट किए। प्राचार्या डॉ. सविता भगत ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी कवियों व विशिष्ट जनों का आभार प्रकट किया।

अपने सम्बोधन में डॉ.भगत ने मातृभाषा हिंदी की जीवन में उपयोगिता को इंगित करते हुए कहा कि हमें नई भाषाओं को भी सीखना चाहिए लेकिन मातृभाषा में कही गई बात से हमारी भावनाएं ज्यादा अच्छे से ना केवल अभिव्यक्त हो पाती है बल्कि सामने वाले को अच्छे से समझ भी आती है |

हिंदी हमें अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ती है। इसलिए हमें हिंदी भाषा का ज्ञान अच्छे से होना चाहिए। इस कार्यक्रम की संयोजक मैडम ममता कुमारी रहीं व सह संयोजक की भूमिका में डॉ.योगेश शर्मा व देवदत्त रहे।

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