फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद:महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर सेक्टर-12 निवासी अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने दोनों महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी देश और समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं
गांधी ने सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी,ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया।
अधिवक्ता डॉ.मोहन तिवारी ने कहा कि एक अधिवक्ता के लिए सत्य,न्याय और संविधान के मूल्यों का विशेष महत्व है। कानून केवल अदालतों में मुकदमों के निपटारे का माध्यम नहीं,बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय की स्थापना का महत्वपूर्ण आधार है।
गांधी के सत्य और अहिंसा के विचार तथा शास्त्री की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होने की आवश्यकता है।
कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति को उसके अधिकारों की जानकारी देना तथा उसे न्याय की प्रक्रिया तक पहुंचने में सहयोग करना समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।
डॉ.मोहन तिवारी ने कहा कि महात्मा गांधी ने समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और सम्मान की बात की। उनके विचारों में स्वच्छता,आत्मनिर्भरता,ग्राम स्वराज और सामाजिक सद्भाव को महत्वपूर्ण स्थान मिला। वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन में पद से अधिक महत्वपूर्ण ईमानदारी और जिम्मेदारी है।
उनका‘जय जवान,जय किसान’का संदेश आज भी देश की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि गांधी और शास्त्री को याद करने का सबसे सार्थक तरीका उनके जीवन-मूल्यों को केवल भाषणों और आयोजनों तक सीमित रखना नहीं,बल्कि उन्हें अपने व्यवहार में उतारना है।
सत्य के प्रति प्रतिबद्धता,कानून का सम्मान,जरूरतमंदों की सहायता,सामाजिक सद्भाव और अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन ही दोनों महान नेताओं के प्रति वास्तविक सम्मान होगा।अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ.मोहन तिवारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे गांधी और शास्त्री के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज का निर्माण तभी संभव है,जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें तथा न्याय,शांति और मानव गरिमा के मूल्यों को जीवन में स्थान दें।