गोरखपुर में आक्सीजन का संकट अभी टला नहीं है। कई निजी हास्पिटलों ने आक्सीजन के अभाव में मरीजों को रेफर कर दिया जबकि कइयों ने आक्सीजन न होने की बात कहकर मरीज को भर्ती करने से ही मना कर दिया। वहीं कुछेक अस्पताल ऐसे भी हैं। जिनका कहना है कि आक्सीजन की किल्लत कुछ हद तक दूर हुई है। वहीं संकट की वजह से मरीजों के तीमारदार इधर-उधर भटकते दिखाई दिए। आर्यन हास्पिटल के डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन के संकट में वह मरीज को रेफर कर रहे हैं। ऑक्सीजन मिल रहा है लेकिन उतना नहीं जितने की जरूरत है। मरीजों की जान खतरे में नहीं डाल सकते हैं। इसलिए रेफर कुछ को रेफर भी कर रहे हैं। मुश्किल से काम चल रहा है। दो स्टॉफ हर समय प्लांट पर बैठा रह रहा है। बैकअप के लिए सप्लाई और अच्छी करनी होगी तभी संकट खत्म होगा। स्टार हॉस्पिटल के डॉ. विजाहत करीम ने बताया कि उनके यहां कोविड के 10 मरीज भर्ती हैं। फिलहाल तीन घंटे के लिए ही आक्सीजन मौजूद है। प्रशासन ने शाम तक कुछ और आक्सीजन सिलेंडर देने का आश्वासन दिया है। पीसी हॉस्पिटल धर्मपुर से डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि कोविड पीड़ित 10 मरीज ऑक्सीजन पर हैं। 4 जम्बो आक्सीजन सिलेंडर बैकअप में है। ऑक्सीजन लेने गाड़ी गई हुई है। कब तक मिलेगा, पता नहीं। डिग्निटी हॉस्पिटल की सुनीता शाही ने बताया कि उनके यहां 20 जम्बो सिलेंडर उपलब्ध हैं। 8 मरीज ठीक होकर गए हैं जबकि 7 और भर्ती हो गए हैं। मौजूदा समय में कोविड से पीड़ित 45 मरीज भर्ती हैं। प्रतिदिन 130 से 140 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है। प्रशासन टुकड़े-टुकड़े में सिलेंडर दे रहा है लेकिन समय से सिलेंडर मिल जा रहा है। दुर्गावती हास्पिटल-बड़हलगंज के निदेशक डा. मनोज यादव ने बताया कि 40 बेड हैं। 29 कोविड मरीज भर्ती हैं। शुक्रवार की दोपहर व शाम को दो बार में 40-40 सिलेण्डर मिले हैं। शनिवार की दोपहर तक ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई। शनिवार की दोपहर में 24 सिलेण्डर आक्सीजन प्रशासन ने मुहैया कराया। शाम तक 40 सिलेण्डर मिलने की उम्मीद है। गीडा से गाड़ी चल दी है। उन्होंने कहा कि गीडा से सिलेण्डर आने में पांच से छह घण्टे का समय लग रहा है। अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था बहुत जरूरी है। गोरखपुर हास्पिटल राजेन्द्र नगर के निदेशक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे यहा 13 बेड आईसीयू के हैं। सभी पर कोविड मरीज भर्ती हैं। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। शुक्रवार को 25 सिलेण्डर आक्सीजन मिला। शनिवार को भी 25 सिलेण्डर ऑक्सीजन मिला। जबकि हमारी आवश्यकता 50 सिलेण्डर की है। प्रशासन ने शाम तक 25 सिलेण्डर मुहैया कराने को कहा है। हमारे पास चार घण्टे का बैकअप अभी है। उम्मीद है तब तक हमे और सिलेण्डर मिल जाएंगे। आक्सीजन की कमी से हमारे यहा कोई मौत नहीं हुई है। गोरखपुर हॉस्पिटल के डा. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि अभी भी स्थिति पहले जैसी ही है। बैकअप नहीं हो पा रहा है। बहुत ही ठकिनाई से सिलेण्डर मिल पा रहा है। डिमांड के सापेक्ष 40 से 45 फीसदी ही सप्लाई हो रही है। आश्वासन मिला है कि अगले दो दिन में किल्लत दूर हो जाएगी। देखिए आगे क्या होता है। वहीं पैनेशिया के मैनेजर मणि सुबह आठ बजे मिलना चाहिए था। एक बजे तक आक्सीजन मिला है। चार घंटे का बैकअप था पांचवां घंटा जैसे-तैसे निकाला है। 96 बेड के हास्पिटल में 380 सिलेंडर रोजाना का खर्च है। बड़े काजीपुर पूर्वांचल बैंक के पास रहने वाली अंजूम एक सप्ताह से उदया हास्पिटल में भर्ती थीं। शुक्रवार को डिस्चार्ज होकर घर आई तों आक्सीजन लेवल फिर कम होने लगा। परिवारीजन आक्सीजन को लेकर लॉकडाउन में ही उधर-उधर दौड़ रहे हैं। अंजुम के घर के रहने वाले खुर्शीद अहमद ने बताया कि ऑक्सीजन लेवल 85 हो गया है। किसी तरह से अगर एक सिलेंडर की व्यवस्था हो तो करा दीजिए। बक्शीपुर के रहने वाले नवल किशोर नथानी अपने दाउदपुर में रहने वाले रिश्तेदार अरुण पोद्दोर के लिए पूरे दिन आक्सीजन की तलाश किए तो एक सिलेंडर उन्हें मिल पाया है। नवल किशोर ने बताया कि पांच दिन से आक्सीजन लेवल अप-डाउन हो रहा है। जो सिलेंडर मिला है वह भी खत्म होने वाला है एक और सिलेंडर के लिए परेशान हूं।
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