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लेखक दिनेश गुप्ता पत्रकार
दोस्तों यह दिन हमें बहुत कुर्बानियों के बाद आया है, इसके खातिर हमारी महान क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया है जिन्हें हम मात्र महसूस कर सकते हैं और उनके गाथाओं को अपने आने वाली पीढ़ियों को सुना सकते हैं, न जाने वो कैसा मंजर रहा होगा जब हमारे हमारे शहीद वतन के खातिर कुर्बान हो गए ।
लहू मेरे जिगर का कुछ काम तो आया
शहीदों में सही लवों पर नाम तो आया।
जां से प्यार वतन इस की शान के खातिर
मौत के बाद दिल को आराम तो आया।।
बलिदानों की ज्वाला जलाए रखना,
लहराता तिरंगा यूं ही उठाये रखना
जान जाए तो जाये कोई गम नहीं
देश पर कुर्बानियों का मातम न कर
मौत के बाद भी खुद को मुस्कराए रखना।
न झुकने देना कभी इसके मान को,
न मिटने देना कभी इसकी शान को।
चाहे कुर्बान करनी पड़े जान को।।
अपने सीने से इसको लगाए रखना
ये तिरंगा यूं ही उठाये रखना।
इन रंगों में बलिदानों का रंग तुम्हे मिल जायेगा,
ओढ़ तिरंगा निकलोगे तो अहसास तुम्हे हो जाएगा।
कितनो ने इसके खातिर खुद को सूली चढ़ा दिया,
इतिहास के पन्नो में पढ़ने को मिल जायेगा ।।
काश मरने के बाद भी वतन के काम आता
शहीदों के दुनिया में अपना भी नाम आता
हंस के लुटा देते जान इस वतन के लिए
कोई फिक्र नहीं होती गर ऐसा मुकाम आता।।