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धनतेरस आज व दीपावली 4 नवम्बर को मनायेंगे भारतवासी।

जनमानस स्थिर लग्न में लक्ष्मी प्राप्ति के लिए करे पूजा–पं बृजेश पाण्डेय

रिपोर्ट ब्यूरो

गोरखपुर। विद्वत जनकल्याण समिति के महामंत्री व युवा जनकल्याण समिति के संस्थापक संरक्षक पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धनत्रयोदशी धनतेरस 2 नवम्बर दिन मंगलवार व दीपावली 4 नवम्बर दिन बृहस्पतिवार को सम्पूर्ण भारतवासी हर्षोल्लास के साथ मनायेंगे.
शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न सर्वोत्तम मुहूर्त है स्थिर लग्न वृश्चिक प्रात: 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक,
कुम्भ लग्न 1 बजकर 38 मिनट दोपहर से 3 बजकर 9 मिनट सायं काल तक,
वृष लग्न सायंकाल प्रदोष काल में 6 बजकर 14 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक, सिंह लग्न रात्रि काल में 12 बजकर 42 मिनट से 2 बजकर 56 मिनट तक।
द्विस्वभाव मुहूर्त धनु लग्न 9 बजकर 45 मिनट प्रात: से 11 बजकर 51मिनट दोपहर तक,
मीन लग्न 3 बजकर 9 मिनट सायंकाल से 4 बजकर 37 मिनट सायंकाल तक, मिथुन लग्न 8 बजकर 10 मिनट रात्रिकाल से 10 बजकर 24 मिनट रात्रि तक, कन्या लग्न भोर में 2 बजकर 56 मिनट से 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।
पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य के अनुसार प्रदोषकाल यानि सायंकाल 6 बजकर 14 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक दीपावली उत्सव मनाना चाहिए,बाकी और सभी लग्नो में दुकान,प्रतिष्ठान व्यापार आदि की बृद्धि हेतु पूजन करें,अपने राशि के अनुसार भी पूजा करना चाहिए जो निम्न प्रकार है
मेष राशि के जातक -वृश्चिक,धनु,मीन,सिंह कन्या लग्न में पूजा करें,
वृष राशि के जातक –कुम्भ, वृष,मिथुन, कन्या लग्न में पूजा करे,
मिथुन राशि के जातक—मिथुन,सिंह, कन्या,कुम्भ,वृष,लग्न में पूजा करें।
कर्क राशि के जातक—वृश्चिक, धनु,कुम्भ,मीन,वृष, मिथुन, कन्या लग्न में पूजा करें,
सिंह राशि के जातक–सिंह, कन्या,मिथुन,वृश्चिक, धनु, मीन।
कन्या राशि के जातक–कन्या,कुम्भ,वृष,मिथुन। तुला राशि के जातक –कुम्भ, वृष,मिथुन, कन्या।वृश्चिक राशि के जातक के लिए—वृश्चिक,धनु,मीन,सिंह लग्न।
धनु राशि के जातक के लिए–धनु,मीन,मिथुन,सिंह, कन्या लग्न।
मकर राशि के जातक के लिए–कुम्भ, वृष,मिथुन, कन्या लग्न ।
कुम्भ राशि के जातक के लिए– कुम्भ,वृष,मिथुन, कन्या लग्न श्रेयष्कर।
मीन राशि के जातक के लिए–मीन,मिथुन,सिंह, कन्या,वृश्चिक, धनु,लग्न श्रेयष्कर है।
पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने यह भी बताया कि पूजन के लिए छोटी चौकी या पिढा पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर अष्टदल बनावें उसके उपर गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति रखें कुबेर एवं धनवंतरी तथा हनुमान जी की मूर्ति भी रख सखते है उसके बाद पूजन कि जो भी सामग्री उपलब्ध हो षोडशोपचार या पंचोपचार पूजन करें. अष्टमहालक्ष्मी से प्रार्थना करते हुए उत्सव मनावें मान्यता है कि श्रीरामचन्द्र जी लंका पर विजय पाकर जब वापस अयोध्या लौट रहे थे तो खुशी में सभी अयोध्या वासी श्रीरामचन्द्र जी के स्वागत के लिए घी के दीप प्रज्वलित किते व खुशियां मनायें ।दीपावली की रात्रि में सभी प्रकार की सिद्धि भी की जाती है विशेषकर लक्ष्मी प्राप्ति हेतु पूजन करें तथा खीर,कमल बीज,बेलगुद्दी,बेलपत्र आदि जो भी उपलब्ध हो गाय के घी में मिलाकर बेल की लकड़ी पर हवन करें इस प्रकार करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर धन धान्य पूर्ण करती है !

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