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चौरी-चौरा जन क्रांति पर आधारित है फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी चौरा’

 

रिपोर्ट ब्यूरो गोरखपुर

गोरखपुर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक कहानियों और अमर सेनानी क्रांतिकारियों के संघर्ष पर फिल्म बनाना फिल्मकारों का पसंदीदा विषय रहा है। यह सिलसिला फिल्म आनंद मठ से लेकर अब तक बदस्तूर जारी है। 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, शहीद भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, गांधी जी और सेरा नायडू समेत विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम की अनेक घटनाओं आदि को फिल्मी परदे पर उतारने का कार्य अब भी फिल्मकारों को खूब लुभाता है। अभिनेता मनोज कुमार, प्रेम चोपड़ा से लेकर सनी देओल, अजय देवगन, चिरंजीवी और अभिषेक बच्चन आदि सितारे इन ऐतिहासिक फिल्मों का हिस्सा बन चुके हैं।

हाल ही में इस फेहरिश्त में एक और फिल्म शामिल हो गई है, यह है चौरी चौरा जन क्रांति पर आधारित ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’। सांसद और प्रख्यात अभिनेता रविकिशन इस फिल्म में प्रमुख किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग सौ दिवसीय शेड्यूल में बीते दिनों में गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में की गई। फिल्मकार अभिक भानू निर्देशित और रंगमंच से जुड़े रविशंकर खरे निर्मित इस फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन कार्य चल रहा है। चौरी-चौरा जन क्रांति की ऐतिहासिक घटना और उसमें शामिल अमर सेनानियों की शौर्य गाथा इस फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ के माध्यम से अब शीघ्र ही जन-जन तक पहुंचेगी।

सांसद-अभिनेता रविकिशन की है फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका
गोरखपुर से सांसद और प्रख्यात अभिनेता रविकिशन ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं रविकिशन अपने संसदीय क्षेत्र से संबंधित ऐतिहासिक स्थान और विषय पर आधारित इस फिल्म को लेकर खासे उत्साहित हैं। फिल्म के निर्माता रविशंकर खरे ने बताया कि रवि किशन इस फिल्म में चौरी-चौरा जनक्रांति के प्रमुख नायकों में से एक भगवान अहीर के किरदार में हैं। श्री खरे ने बताया कि हमारी पटकथा के अनुसार फिल्म में कुल 58 महत्वपूर्ण पात्र कहानी के केंद्र में हैं।

सत्याग्रही भगवान अहीर के उत्पीड़न से पनपी थी जन विद्रोह की ज्वाला
ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि चौरी चौरा जन विद्रोह की शुरूआत सेना छोड़ असहयोग आंदोलन में सत्याग्रही बने भगवान अहीर पर फिरंगी पुलिस के उत्पीड़न के बाद हुई थी। एक फरवरी 1922 को फिरंगी पुलिस के दारोगा ने असहयोग आंदोलन में सक्रियता से क्रुद्ध होकर भगवान अहीर की बेरहमी से पिटाई कर दी थी। भगवान अहीर अपने ऊपर हुई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से डरे-डिगे नहीं। भगवान अहीर और श्याम सुन्दर मिश्र के साथ अन्य कई साथी सत्याग्रहियों के नेतृत्व में 4 फरवरी 1922 को जुटे सत्याग्रहियों (ग्रामीणों-किसानों) पर फिरंगी पुलिस ने गोलियां खत्म होने तक फायरिंग की थी, जिसमें सैंकड़ों निहत्थे सत्याग्रिहयों की जान चली गई थी। भड़के सत्याग्रहियों ने प्रतिकार स्वरूप चौकी फूंकने की घटना को अंजाम दिया था। चौकी में हुई आगजनी की घटना में दरोगा गुप्तेश्वर सिंह समेत 23 पुलिसकर्मयों की मौत हो गई थी।

बाबा राघव दास की पहल पर महामना ने की सत्याग्रहियों की पैरवी
इस घटना से बौखलाई फिरंगी प्रशासन ने चौरा-चौरी में मार्शल-लॉ लगा दिया और बदले की भावना से कार्रवाई करते हुए आसपास के पूरे क्षेत्र में जमकर कहर बरपाया। हजारों ग्रामीणों-किसानों को हिसासत में लेकर उन पर अत्याचार किया। ज्ञात-अज्ञात हजारों सत्याग्रहियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और सैंकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। 1000 लोगों की पहचान की गयी, जिसमें से 288 स्वयं सेवकों को हिरासत में ले लिया गया। फिरंगी पुलिस के उत्पीड़न से 6 सत्याग्रहियों की मौत हिरासत में ही हो गयी। सत्याग्रहियों को बचाने, उनकी पैरोकारी करने के लिए बाबा राघव दास ने आगे आने की हिम्मत दिखाई। बाबा राघव दास की पहल पर ही महामना मदन मोहन मालवीय ने सत्याग्रहियों की पैरवी की थी।

‘चौरी-चौरा जन विद्रोह’ को सरकारों, इतिहासकारों ने छिपाया-दबाया
फिल्म के निर्माता रविशंकर खरे कहते हैं कि ब्रिटिश अत्याचारों से पनपे आक्रोश के बाद हुई जन क्रांति की इस घटना को स्वतंत्रता के बाद भी सरकारों ने भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया। हमारे अधिकांश इतिहासकार और लेखक भी इस विषय पर उदासीन ही रहे। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से की गई पहल के बाद इतिहास के पन्नों पर चढ़ी धूल हटाने का कार्य शुरू हुआ और कुछेक लेखकों ने ‘चौरी-चौरा’ जन क्रांति पर अपनी लेखनी चलाने की हिम्मत दिखाई है। इसी क्रम में स्वयं उन्होंने भी फिल्मकार अभिक भानू संग पहल करते हुए अपनी टीम के साथ स्वाधीनता संग्राम की इस महत्वपूर्ण घटना पर फिल्म बनाने की योजना को साकार करने का बीड़ा उठाया। श्री खरे ने कहा कि इस फिल्म के निर्माण से जुड़ी पूरी टीम का प्रयास किया है कि चौरी-चौरा जन क्रांति की घटना और उसमें शामिल अमर सेनानियों की शौर्य गाथा को फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए।

चौरी-चौरा की घटना पर बनने वाली यह है पहली हिन्दी फिल्म
चौरी-चौरा की घटना पर बनने वाली यह पहली हिन्दी फिल्म है। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाए जाने की तैयारियों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ को गोरखपुर जनपद के ऐतिहासिक कस्बे चौरी चौरा समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ और देवरिया आदि प्रमुख स्थानों पर फिल्माया गया। फिल्म के निर्माता रविशंकर खरे ने बताया कि ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ के निर्माण से संबंधित विभिन्न पक्षों के लिए जहां प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश के ही तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं ली गई हैं, वहीं स्थानीय कलाकारों को काम करने का मौका भी दिया गया।

कथा-पटकथा तैयार करने से पूर्व लेखन टीम ने किया है व्यापक शोध
रविशंकर ने बताया कि फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ की कहानी लिखने और फिल्मांकन के लिए पटकथा (स्क्रिप्ट) तैयार करने से पूर्व इस ऐतिहासिक घटना को लेकर हमारी टीम ने व्यापक शोध किया है। इसके उपरांत ही फिल्म की स्क्रिप्ट को अंतिम रूप दिया गया। श्री खरे बताते हैं कि स्क्रिप्ट तैयार करने में प्रो. हिमांशु चतुवेर्दी की पुस्तक ‘चौरी चौरा एक पूर्णावलोकन राष्ट्रीय आयाम की एक स्थानीय घटना’ के साथ ही कई अन्य प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों के स्रोत को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न ऐतिहासिक बिन्दुओं का तथ्यात्मक अध्ययन किया गया है। श्री खरे ने बताया कि इस स्क्रिप्ट को पूरा करने में 8 महीने का समय लगा।

यह है ऐतिहासिक फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’ की टीम
रविशंकर खरे ने सरयू विजन के बैनर तले बनी इस ऐतिहासिक फिल्म ‘1922 प्रतिकार : चौरी-चौरा’की निर्माण टीम के बारे में बताया कि सह निर्माता अंजू खरे हैं। दो दशक से मीडिया और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय मीडिया प्रबंधक, फिल्मकार, पत्रकार, गौरव शंकर खरे क्रिएटिव प्रोड्यूसर के साथ ही मीडिया प्रमोशन का दायित्व भी निभा रहे हैं। अभिक भानू निर्देशित इस फिल्म की शूटिंग 100 दिन के नियमित शेड्यूल पूरी की गई है।
पटकथा लेखन में इतिहासविद् प्रो. हिमांशु चतुवेर्दी और रंगमंच से जुड़े रविशंकर खरे के साथ मनोज शर्मा, अंजू खरे, अनुराधा सूर्यवंशी, पवन पांडे, सचिन अवचिटे, गौरव गोविंद, योगेंद्र बहादुर खरे, सुषमा, निशिगंधा, दीपा मुखर्जी और विश्वनाथ सहित करीब 20 लेखकों की टीम शामिल रही। फिल्म की पटकथा को अंतिम रूप देने में रवि शंकर खरे, मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव, केशव, टीना गुप्ता, चैतन्यसिंह गोहिल और छवि गौरांग ने खासी मेहनत की है। फिल्मांकन की कमान फोटोग्राफी के निर्देशक मनोज गुप्ता के हाथ रही। किसी भी ऐतिहासिक फिल्म में कला पक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अब इस फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का कार्य चल रहा है। फिल्म एडिटर अरुण शेखर की देखरेख में संपादन का कार्य किया जा रहा है। श्री खरे का दावा है कि ‘1922 प्रतिकार चौरी चौरा’ ऐसी पहली ऐतिहासिक फिल्म होगी, जिसे वैश्विक स्तर पर भव्यता के साथ रिलीज करने की योजना है।

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