मीरजापुर। अहरौरा नगर के पट्टीकला क्षेत्र में साढ़े तीन करोड़ रुपए की लागत से बन रहे पार्क के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। शिकायतों के बाद जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान एसडीएम अनेग सिंह और कार्यदायी संस्था सीएनडीएस (Construction and Design Services) के अभियंताओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की, जिसमें कई खामियां सामने आईं।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम के समक्ष सीएनडीएस के सहायक अभियंता ने निर्माण में प्रयुक्त ईंटों की गुणवत्ता का परीक्षण कराया। परीक्षण के दौरान ईंट दोयम दर्जे की पाई गई और कुछ ईंटें जांच के दौरान ही कई टुकड़ों में टूटकर गिर गईं। यह देखकर जांच टीम के सदस्य हतप्रभ रह गए।
सभासदों ने जताया विरोध
नगर के सभासदों ने पहले ही पार्क निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और मानकों के विपरीत कार्य किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की थी। सभासदों का कहना है कि लाखों रुपए की लागत से बनने वाला यह पार्क नगर के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा है, लेकिन यदि इसमें मानकहीन सामग्री का प्रयोग होगा तो यह कुछ ही महीनों में बेकार साबित होगा।
डीएम ने दिए थे जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मीरजापुर ने संयुक्त जांच टीम गठित कर उसे मौके पर स्थलीय जांच के निर्देश दिए। आदेश के बाद एसडीएम अनेग सिंह, एक्सियन सीएनडीएस, और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की टीम ने गुरुवार की देर शाम निरीक्षण किया। टीम ने मौके से ईंट, बालू, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री के सैंपल एकत्र किए जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
स्थलीय निरीक्षण में सामने आए तथ्य
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त ईंटें दोयम दर्जे की हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। फर्श और दीवारों में दरारें दिखाई दीं, जबकि कार्य अभी पूर्ण भी नहीं हुआ है। टीम ने निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ भी की।
एसडीएम अनेग सिंह ने बताया, “पार्क निर्माण की गुणवत्ता की शिकायत मिलने के बाद जांच की गई। प्रारंभिक निरीक्षण में कुछ कमियां पाई गई हैं। निर्माण सामग्री के सैंपल लैब टेस्ट के लिए भेजे गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
जनता में आक्रोश
स्थानीय नागरिकों ने भी जांच टीम के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद पार्क निर्माण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। कई जगहों पर घटिया ईंट, पतला सीमेंट और खराब क्वालिटी की बालू इस्तेमाल की जा रही है।
विकास कार्यों की पारदर्शिता पर उठे सवाल
अहरौरा नगर में चल रहे अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो अन्य ठेकेदार भी मानकों की अनदेखी जारी रखेंगे।