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64 वर्षों की उच्च शैक्षणिक यात्रा में विभाग से निकलीं अनेक प्रतिभाएं।

रिपोर्ट ब्यूरो

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, के प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से बुधवार को ऑनलाइन पुरातन छात्र-सम्मेलन का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यक्रम में 125 से अधिक पुरातन छात्रों ने अपने संस्मरणों को साझा कर पुरातन छात्र परिषद की महत्ता को परिभाषित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो0 राजेश सिंह ने कहा कि आज विश्व के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों को उनके पुरातन छात्रों द्वारा संचालित किया जा रहा है। मुख्य अतिथि प्रो0 विपुला दुबे ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग से विलक्षण प्रतिभाएं निकली हैं।
विशिष्ट अतिथि विभाग के पूर्व आचार्य एवं उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष प्रो0 ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने विभाग की गौरवमयी परम्परा को पुनर्जीवित करने पर बल दिया। प्रो0 विश्वकर्मा ने कहा कि इस गौरवशाली विभाग का पुरातन छात्र और आचार्य बनने का सौभाग्य मुझे भी मिला है जिसके लिए मैं चिर ऋणी हूँ। अधिष्ठाता, कलासंकाय प्रो0 नन्दिता सिंह ने कहा कि विभाग की प्रतिष्ठा उसके विद्यार्थियों और पुरातन छात्रों से जुड़ी होती है। प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 शीतला प्रसाद सिंह ने समारोह में शामिल सभी अतिथियों एवं पूर्व छात्र-छात्राओं का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। संचालन प्रो0 दिग्विजय नाथ और आभार ज्ञापन प्रो0 प्रज्ञा चतुर्वेदी ने किया। प्रो0 राजवन्त राव ने विषय प्रवर्तन किया। सम्मेलन से अनेक पुरातन अध्येताओं, डाॅ0 डी0एन0 दुबे एवं डाॅ0 रामप्यारे मिश्र आदि ने भी अपने विचार रखें।

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