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राखी की ऐतिहासिक अनोखी कहानी, पढ़िए IBN पर

 

रिपोर्ट फणीन्द्र कुमार मिश्र सिसवा बाजार महराजगंज

 

रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मतलब राखी का त्योहार हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाये जाने की परंपरा सदियों से रही है। इस पवित्र त्यौहार के चर्चे इतिहास, महाभारत काल, सिकंदर के समय उसकी पत्नी द्वारा राजा पुरु को राखी बांधना ,रानी कर्मावती का हुमायूं को राखी भेजना पहले से ही इतिहास के पन्नों में वर्णित है। बताते चलें कि इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं और भाई उनके रक्षा का वचन देते हैं जिसके पीछे कई ऐसे कारण और कहानियां जिन्हें कम ही लोग जानते हैं।

रक्षाबंधन मनाने के पीछे जितने भी कारण हैं उनमें कृष्ण-द्रौपदी की कहानी सबसे रोचक है। कहा जाता है कि जब युधिष्ठिर का इंद्रप्रस्थ में राज्याभिषेक होना था तो उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था जिसने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का सिर काट दिया इस दौरान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई और रक्त बहने लगा तब द्रौपदी ने झट से साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया था कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। यह घटना जिस दिन हुई थी

 

उस दिन सावन महीने की पूर्णिमा तिथि थी। कौरव सभा में वस्त्रहरण के समय श्रीकृष्ण ने अपने वचन को पूराकर द्रौपदी की लाज बचाई इसलिए सावन पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई।एक दूसरा प्रसंग यह भी है कि मृत्यु के देवता यमराज को एक बार यमुना ने राखी भेजी तो राखी बंधवाने के बाद यमराज ने यमुना को अमरता का वरदान दे दिया। प्राणों को हरने वाले ने अमरता का वरदान दिया, यह एक आश्चर्यजनक बात थी। तब से ही यह कहा गया कि जो भाई रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएंगे, यमराज उनके प्राणों की रक्षा करेंगे।

 

राखी से जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के शत्रु पोरस को राखी बंधकर अपना मुंहबोला भाई बनाया और यह वादा लिया कि वह युद्ध में उसके पति सिकंदर की जान बख्श दे। पोरस ने भी युद्ध के दौरान राखी के धागों की लाज रखी और सिकंदर को जीवनदान दिया। महाभारत युद्ध जीतने में भी राखी का योगदान है कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं कैसे सभी संकटों से पार पा सकता हूं तब कृष्ण ने उन्हें तथा उनकी सेना को रक्षा धागा बाधने को कहा तब से इस दिन पवित्र रक्षासूत्र बांधा जाता है। यह घटना भी सावन पूर्णिमा के दिन ही हुआ माना जाता है।

एक प्रसंग यह भी है कि मेवाड़ की रानी कर्मावती को यह पता चला कि उनके राज्य पर आक्रमण होने वाला है तो उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी और याचना की कि वह उनके राज्य की रक्षा करें। मुगल सम्राट होने पर भी हुमायूं ने कर्मावती की भावनाओं का सम्मान किया और मेवाड़ पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने कर्मावती की तरफ से बहादुरशाह के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जिन भाइयों की अपनी बहनें नहीं होती वह मुंहबोली बहनों से राखी बंधवाते हैं। इस दिन के लिए देशभर से सीमा पर तैनात जवानों को भी राखियां भेजी जाती हैं। ये कहानियां कितनी सही हैं इस बारे में तो कोई तर्क नहीं दिया जा सकता पर हां, यह बात जरूर है कि यह दिन भाई-बहन के प्यार में नवीनता लेकर आता है।

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