रिपोर्ट: बी.आर. मुराद | IBN NEWS फरीदाबाद
फरीदाबाद।
सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने फरीदाबाद के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से मांग की है कि यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दूसरी जगह रेफर करने की प्रथा को तत्काल खत्म किया जाए। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद जैसे औद्योगिक और स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले शहर में उचित स्वास्थ्य सेवाओं का घोर अभाव है।
🩺 सभी सरकारी अस्पतालों में मिले पूरी सुविधाएं
हुड्डा ने कहा कि मरीजों को इलाज, जांच और दवाई के लिए कहीं और भटकना न पड़े, इसके लिए सरकार को पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ, दवाएं, जांच उपकरण और ए-ग्रेड ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “रेफर टू दिल्ली” की पर्ची की जगह मरीजों को वहीं इलाज मिले, ये प्राथमिकता होनी चाहिए।
📜 जन समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन सौंपा गया
फरीदाबाद रेफर मुक्त संघर्ष समिति के संयोजक संजय भाटिया और सतीश चोपड़ा ने सांसद से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। हुड्डा ने समिति की मांगों को “पूर्णतः न्यायोचित” बताते हुए सरकार से इनके समाधान की मांग की।
🏨 अस्पतालों की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक
सतीश चोपड़ा ने बताया कि सिविल अस्पताल फरीदाबाद में:
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सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर जैसे गैस्ट्रो, नेफ्रो, यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं
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डिजिटल एक्सरे मशीन, ऑक्सीजन प्लांट वर्षों से बंद पड़े हैं
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वार्ड के एसी, शौचालय, वाटर कूलर खराब हालत में हैं
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फायर सेफ्टी का कार्य 3 साल से रुका हुआ है
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एकमात्र लिफ्ट भी अक्सर खराब रहती है
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मोर्चरी में 14 में से अधिकांश फ्रीजर काम नहीं कर रहे
गर्मियों में शवों की दुर्गति आम बात बन चुकी है।
🏥 छायंसा मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति
2020 में अधिग्रहीत 460 बेड वाले अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, छायंसा में अभी तक:
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ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है
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डॉक्टरों के 85 पदों में से केवल 35 पद ही भरे गए हैं
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सिर्फ जनरल आईपीडी और इमरजेंसी वार्ड ही संचालित हो रहा है
🛣 विकास की अनदेखी और टैक्स की भरमार
हुड्डा ने कहा कि फरीदाबाद से सरकार पांच तरफ से टोल और टैक्स वसूल रही है, लेकिन जनता को स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में 700 करोड़ की लागत से ईएसआई मेडिकल कॉलेज, मेट्रो, फ्लाईओवर, फोरलेन सड़क और आईएमटी जैसे प्रोजेक्ट पूरे हुए थे।