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शराब नहीं पीते फिर भी लिवर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है फैटी लिवर के मरीज डॉ.रामचंद्र सोनी

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:लाइफ स्टाइल और खान पान बन रही बड़ी वजह समय रहते जांच जरूरी है आप शराब का सेवन नहीं करते हैं, तब भी लिवर की बीमारी का खतरा बना रहता है।

इसे नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएफएलडी) कहा जाता है। पिछले पांच वर्षों में इसके मरीजों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर 86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ.रामचंद्र सोनी के कहा कि यह समस्या तेजी से युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में बढ़ रही है।

अव्यवस्थित लाइफ-स्टाइल, तला-भुना और अधिक कैलोरी वाला भोजन,मांसाहार की अधिकता और व्यायाम की कमी इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में लगातार थकान,कमजोरी,पेट के दायीं ऊपरी हिस्से में दर्द और सूजन शामिल हैं,जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

लिवर पर जमता है फैट,कामकाज होता है प्रभावित
फैटी लिवर की स्थिति में लिवर में वसा जमा होने लगती है,जिससे इसकी कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। इसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है और धीरे-धीरे पूरा शरीर प्रभावित होने लगता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी में बदल सकती है।

अस्पतालों की ओपीडी में 20 से 25 फीसदी मरीज फैटी लिवर की समस्या से जुड़े आ रहे हैं। यह 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से लिवर फंक्शन टेस्ट और पेट का अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए।

करोना के बाद कई मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई है,जिससे लिवर संबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं। करीब 5 से 7 फीसदी मरीजों में संक्रमण के बाद लिवर पर असर देखा गया है।
➡️केस स्टडी 1
ओल्ड फरीदाबाद निवासी 38 वर्षीय आशीष को जनवरी में कोविड हुआ था। ठीक होने के करीब 10 दिन बाद उन्हें बुखार,पेट दर्द और कमजोरी महसूस होने लगी।

जांच में लिवर में पस और संक्रमण पाया गया। समय पर इलाज मिलने से अब उनकी स्थिति सामान्य है।
➡️केस स्टडी 2
बल्लभगढ़ की 42 वर्षीय संगीता लंबे समय से थकान और पेट में भारी पन महसूस कर रही थीं।

शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजर अंदाज किया,लेकिन जांच कराने पर नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का पता चला। डॉक्टर की सलाह पर डाइट और नियमित व्यायाम अपनाने से उनकी स्थिति में सुधार हुआ। फैटी लीवर की बीमारी से बचाव के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है।

ताजे फल,हरी सब्जियां,अंकुरित अनाज,फलियां,अखरोट,जैतून का तेल,लहसुन और जामुन का सेवन फायदेमंद है। साथ ही रोजाना कम से कम 45 मिनट व्यायाम करना चाहिए और उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।

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