फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: भारतीय प्रवासी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय प्रवासी परिषद के संस्थापक डॉ. अजय तिवारी ने महापर्व छठ पूजा के अवसर पर सभी छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि छठ केवल एक पूजा नहीं, बल्कि यह एकता, अनुशासन और सामाजिक सहयोग का प्रतीक है।
छठ पर्व से समाज में एकता का संदेश
डॉ. तिवारी ने कहा कि जैसे छठ घाटों पर सभी लोग एक साथ इकट्ठे होकर सूर्य देव की आराधना करते हैं, उसी प्रकार जब किसी प्रवासी भाई पर संकट आता है, तो सभी को एकजुट होकर उसका साथ देना चाहिए।
“यही आपकी एकता की असली पहचान है, और यही भावना समाज को मजबूत बनाती है।”
उन्होंने बताया कि उनकी टीम पिछले दो दिनों से अलग-अलग छठ घाटों जैसे मझगांव, सेक्टर 55, गुड़गांव, द्वारका और विवेकानंद पार्क में जाकर व्रतियों और श्रद्धालुओं से मिल रही है और उन्हें सामाजिक एकता का संदेश दे रही है।
प्रवासियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास
डॉ. तिवारी ने कहा कि छठ पर्व के इस पवित्र अवसर पर प्रवासी समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज उठानी चाहिए।
“हमारा उद्देश्य है कि चाहे कोई ऑटो या रिक्शा चालक हो, झुग्गी में रहने वाला व्यक्ति हो या मजदूर – हर प्रवासी की समस्या सुनी जाए और उसे बराबरी का सम्मान मिले।”
उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाले आगामी चुनावों में प्रवासियों की आवाज को मजबूत बनाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना उनका प्रमुख लक्ष्य है।
हरियाणा और प्रवासियों की एकता से आएगा विकास
डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों — उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, असम, तमिलनाडु और हरियाणा — से आए प्रवासियों को एक परिवार की तरह रहना चाहिए।
“जब आप सब मिलजुलकर रहेंगे, तभी आपका सम्मान और ताकत बढ़ेगी।”
उन्होंने कहा कि हरियाणा के लोग भी छठ पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं और प्रवासी भाइयों के साथ मिलजुलकर त्योहार की खुशियाँ साझा करते हैं।
“अगर इसी तरह समाज एकजुट रहेगा, तो भ्रष्टाचार समाप्त होगा और राज्य में विकास की नई दिशा शुरू होगी।”
सामाजिक एकता का पर्व
डॉ. तिवारी ने स्थानीय नागरिकों से भी अपील की कि वे प्रवासियों को अपने परिवार का हिस्सा समझें। उन्होंने कहा —
“जहाँ आप रहते हैं, वहाँ के स्थानीय लोगों को भी अपना रक्षक और संरक्षक मानिए, जैसे हम भगवान विष्णु को मानते हैं। उन्हें यह एहसास दिलाइए कि आप अतिथि हैं, गणपति हैं, क्योंकि बिना गणपति के कोई शुभ कार्य पूरा नहीं होता।”