फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: लोक आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का पावन महापर्व छठ पूजा सोमवार को पूरे उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया गया। समाजसेवी, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. पं. मोहन तिवारी ने अपने क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ फरीदाबाद खेड़ी पुल स्थित छठ घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और लोक परंपरा का विधिवत निर्वाह किया।
हर वर्ष की भांति इस बार भी घाट पर आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक परिधान में “छठ मइया” के भजनों से वातावरण को भक्तिमय कर रही थीं, वहीं बच्चों ने दीप जलाकर घाट की शोभा को बढ़ाया। घाट परिसर में स्वच्छता और साज-सज्जा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी पिछले 15 वर्षों से निरंतर छठ पर्व का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें सूर्य की ऊर्जा, जल की पवित्रता और मातृशक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना सिखाता है।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि इस पर्व को स्वच्छता, सद्भाव और एकजुटता के साथ मनाएं। डॉ. तिवारी ने कहा कि छठ पर्व भारतीय संस्कृति की जड़ों में बसा है, जो हमें प्रकृति और मनुष्य के सहअस्तित्व का संदेश देता है।
पूजा के दौरान घाट पर चारों ओर भक्ति और उल्लास का वातावरण व्याप्त था। श्रद्धालु महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शाम होते-होते दीपों की लौ से पूरा घाट आलोकित हो उठा, और चारों ओर “जय छठ मइया” के जयघोष गूंजने लगे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी हर वर्ष घाट की स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं लेते हैं। इस वर्ष भी उन्होंने जनसहयोग और सामाजिक भागीदारी से छठ आयोजन को सफल बनाया।
छठ घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने डॉ. तिवारी की सेवा भावना, समर्पण और धार्मिक आस्था की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छठ पर्व अब समाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।