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सेवा त्याग समर्पण का महत्व बताते हुए सुदामा चरित्र पर भक्तों को भाव विभोर करते हुए मित्रता को जीवन का महत्वपूर्ण स्थान बताया -कुमुद ऋषि,

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बीगोद– कस्बे में श्री चामुंडा माता गौशाला में समस्त ग्राम वासियों के सहयोग से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा गंगा महोत्सव के 7 दिवस श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को हुआ ।इस अवसर पर कथा व्यास गौवत्स पं विष्णुश्री कृष्णतनय महाराज ने धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि ग्रहस्थ जीवन मे विरक्ति, जितेंद्रिय और प्रसन्नात्मा व्यक्ति को रहते हुए धर्म का निष्ठा पूर्वक पालन करना चाहिए सेवा त्याग समर्पण का महत्व बताते हुए सुदामा चरित्र पर भक्तों को भाव विभोर करते हुए मित्रता को जीवन का महत्वपूर्ण स्थान बताया साथ ही भैया एकादशी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा की पत्नी ने सुदामा को भगवान श्री कृष्ण के पास जाने का आग्रह किया और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने दयावान हैं वह हमारी सहायता जरूर करेंगे सुदामा ने संकोच भरे स्वर में अपनी पत्नी को कहा कि श्री कृष्ण एक पराक्रमी राजा है और मैं गरीब ब्राह्मण हूं मैं कैसे उनके पास जाकर सहायता मांग सकता हूं सुदामा की पत्नी ने उत्तर दिया क्या हुआ मित्रता में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है सुदामा श्री कृष्ण के पास जाने को राजी हो गए उसकी पत्नी पड़ोसियों से थोड़े-थोड़े चावल मांग कर लेकर लायी एवं वह चावल सुदामा को मित्र को भेट करने के लिए कहा। सुदामा वहां पहुंचकर महल के बारे खड़े होकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा करने लगे। द्वारपालो ने कृष्ण भगवान को संदेश भेजें कोई आपका मित्र आपसे मिलने आया है जो अपना नाम सुदामा बता रहा है दौड़े-दौड़े भगवान श्री कृष्ण सुदामा के पास पहुंचे सुदामा को गले से लगा लिया भाव विभोर होकर रोने लगे भगवान श्री कृष्ण के मिलन का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया गया। भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा महल मे ले जाकर सिहासन पर बैठाकर पैर धोने लगे जिस दौरान इस अश्रु धारा से आंखें भर आई जिससे सुदामा के चरण धूल गये। सुदामा कन्हैया से मिले तो कृष्ण ने उन्हें दो मुट्ठी चावल खाकर दो लोक का स्वामी बना दिया । भगवान कृष्ण बलराम भैया एकादशी ने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं जो प्राणी अपनी अंतरात्मा से भगवान को पुकारता है भगवान सदा उनकी रक्षा करते है। साथ ही कुमुद ऋषि अगस्त ऋषि थे वह साक्षात कुंभ के अवतार है मटका, कलश वह ही कुंभ ऋषि है जिन्होंने एक आचमन सागर को पान कर दिया मतलब पूरे सागर को पी गये । साथ ही कथावाचक तनय ने भागवत कथा का महात्त्मय में बताते हुए कहा कि मानव जीवन में भागवत कथा का बड़ा ही महत्व है कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा मन का शुद्धिकरण होता है प्रत्येक मनुष्य को भागवत की संपूर्ण कथा का श्रवण करना चाहिए भागवत भक्ति एवं भक्ति से शक्ति की प्राप्ति होती है तथा जन्म जन्मांतर के सारे विकार नष्ट होते हैं भागवत इसलिए कराई जाती है कि अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित कराना चाहिए इसके अलावा रोग शोक पारिवारिक अशांति दूर करने आर्थिक समृद्धि खुशहाली को लेकर इसका आयोजन किया जाता है । मंगलवार को संपूर्ण अदृश्य गौशाला में विस्थापित प्रधान कलश की बोली योगेश कुमार सोनी पिता रामेश्वर सोनी निवासी बालाजी का चौक बीगोद 1 लाख1111 मे ली व पांच छोटे ताम्र रुद्राक्ष कलश 11, 111 मे रमेश नागोरी, 11,101 मे मोहनलाल पिता बालू राम खटीक, 4141रूपये मे देवीलाल नायक,5151 मे गोविंद पारीक जालियां,4200 मे बादाम बाई कलाल ने ली( छुठी)। भागवत कथा समापन के कथावाचक कृष्ण तन्मय व महिलाओं पुरुषों ने भजनों पर नृत्य करते हुए फूलों से फागोत्सव मनाया। गौशाला के विकास व भागवत कथा के सफल आयोजन पर एक दूसरे को बधाई दी। इस अवसर मंशापूर्ण महादेव मंदिर वृंदावन धाम के महन्त श्री श्री 1008 राम गिरी जी महाराज, श्यामसुंदर दास जी अयोध्या, नंदकिशोर जी शर्मा भीलवाड़ा, गोविंद जी भीलवाड़ा, बसंती लाल नागोरी, लोकेश कुमार नागोरी, प्रमोद कुमार नागौरी, मुकेश कुमार जोशी त्रिवेणी, हरक चंद आगाल , रतन जी सोमानी, दिनेश व्यास, सुशील व्यास ,राजेश पारीक, गोविंद पारीक, गोपाल सोनी, लादू लाल कुमावत, हरीश जी पारीक जावल, बृजमोहन पारीक जालिया, श्याम लाल खटीक, सुरेंद्र तिलक त्रिवेणी लोकेश आगाल, चारभुजानाथ महिला मडल, पत्रकार साथी मौजूद थे। आमंत्रित अतिथि कथा में सहयोग देने वाले पत्रकार साथियों का दुपट्टा पहनाकर सम्मान सत्कार किया। कार्यक्रम का संचालन महावीर कुमार बापना ने किया।
(फोटो कैप्शन–
1- कृष्ण सुदामा का सजीव चित्रण का वर्णन
2- कथा समापन पर नृत्य करती महिलाएं
3- भागवत कथा के दौरान अतिथियों का सम्मान करते )
फोटो प्रमोद कुमार गर्ग

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