79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देवरिया जनपद न्यायालय परिसर में देशभक्ति और हर्षोल्लास के बीच ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री राम मिलन सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मचारियों के बीच राष्ट्रीय भावना का संचार किया।
उन्होंने राष्ट्रगान के पश्चात संबोधित करते हुए कहा कि सभी को समर्पण और सत्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था को संविधान के मूल्यों पर आधारित बताते हुए कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य है कि शासन की संस्थाएं संविधान की मर्यादा में रहकर काम करें।
समर्पण और सत्यनिष्ठा का संदेश
जनपद न्यायाधीश राम मिलन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमें स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में न्याय, समता और सद्भाव को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका सिर्फ कानूनी निर्णयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना भी आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण व कर्मचारियों से राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ अपने कर्तव्य निभाने की अपील की।
संविधान की शक्ति और जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि हमारा संविधान न्यायपालिका की अहम भूमिका को सुनिश्चित करता है ताकि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को न्याय मिले। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “हम सबको एक ऐसी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि तैयार करनी है जहां स्त्री और पुरुष दोनों को समान अवसर और जीवन की परिपूर्णता प्राप्त हो।” उनका कहना था कि कोई भी राष्ट्र तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके नागरिकों की सोच व्यापक नहीं होती।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्तागण, सभी न्यायिक अधिकारीगण, न्यायालय स्टाफ एवं सुरक्षा कर्मियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और देशभक्ति की भावना के साथ स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ दीं।
सचिव की शुभकामनाएँ
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मनोज कुमार तिवारी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी को शांति, समृद्धि और राष्ट्रीय गौरव की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने भी न्यायिक परिवार को राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
इस कार्यक्रम के माध्यम से न्यायालय परिवार ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका सिर्फ न्याय देने का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और संविधान की रक्षा की एक मजबूत नींव है। उपस्थित सभी लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् जैसे नारों के साथ आजादी के इस पर्व को गौरवपूर्ण रूप से मनाया।