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चिकित्सा पद्धति में विश्वगुरु बनेगा आयुर्वेद – प्रो एके सिंह

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रिपोर्ट ब्यूरो

 

गुरु गोरखनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज आरोग्यधाम में आयुर्वेद एवं धन्वंतरि पर्व समारोह का शुभारंभ

 

आयुर्वेद को प्रथम चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता : प्रो बेदार

गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम बालापार के गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) में सातवें आयुर्वेद पर्व एवं धन्वंतरि जयंती का साप्ताहिक समारोह का शुभारंभ सोमवार को हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने कहा कि दुनिया की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में विश्वगुरु बनने की क्षमता है। इसके लिए हानिरहित इस चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ रही जन जागरूकता को और तीव्र किए जाने की आवश्यकता है।

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प्रो सिंह ने कहा कि आयुर्वेद को चिकित्सा पद्धतियों में विश्व का सिरमौर बनाने की महती जिम्मेदारी आयुर्वेद की पढ़ाई कर रहे छात्रों व इस विधा के वैद्यों पर है। छात्र आयुर्वेद की लगन के साथ पढ़ाई करें और पढ़ाई पूर्ण होने के उपरांत आत्म अभिमान से अपने नाम के पूर्व वैद्य लिखें। उन्होंने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए औषधीय द्रव्यों के संकलन पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय पीलीभीत के प्राचार्य एवं अधीक्षक प्रो. एसएस बेदार ने कहा कि आयुर्वेद का महत्व दिनों दिन बढ़ रहा है। 2022 से 2047 तक का समय आयुर्वेद का अमृत काल है उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति की बजाय प्रथम चिकित्सा पद्धति में स्वीकार करना होगा। प्रो. बेदार ने आयुर्वेद को जीवन पद्धति बताते हुए कहा कि इसका स्थाई भाव विश्व मानवता का कल्याण है।

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समारोह में विशेष रुप से उपस्थित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति एवं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कोरोना संकट काल में पूरे विश्व में आयुर्वेद की महत्ता को स्वीकार किया है। पूरी दुनिया आयुर्वेद के प्रति तेजी से उन्मुख हो रही है और चिकित्सा की हानिरहित वैश्विक आवश्यकता को पूरा करने में अपने देश का बहुमूल्य योगदान होगा। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि गुरु श्री गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज ने अल्प समय में आयुर्वेद की शिक्षा व जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

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समारोह की अध्यक्षता करते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ अतुल वाजपेयी ने कहा कि चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेद सबसे पुरातन है। प्लास्टिक सर्जरी जैसे इलाज हमारे प्राचीन आयुर्वेद के ग्रंथों में वर्णित है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिशों ने आयुर्वेद को खंडित करने की कोशिश की। डॉक्टर वाजपेयी ने आयुर्वेद के छात्रों का आह्वान किया कि वे नित्य नए शोध व अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने के साथ इसके जन जागरण अभियान से भी जुड़ें। समारोह के उद्घाटन सत्र के बाद ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय पीलीभीत के प्राचार्य एवं अधीक्षक प्रो. एसएस बेदार ने महर्षि पुनर्वसु आत्रेय पर विशिष्ट व्याख्यान दिया।

इस अवसर पर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय लखनऊ की प्रोफेसर डॉ शशि शर्मा, दिग्विजयनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ डीपी सिंह, गुरु श्री गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ डीएस अजीथा, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के डीन पैरामेडिकल कोर्सेज, डॉ सुनील सिंह, डॉ गणेश पाटिल, डॉ प्रज्ञा सिंह आदि की मौजूदगी रही। संचालन शांभवी शुक्ला व आशीष चौधरी ने किया। मंपी राय, दीक्षा, आसमा खातून ने धन्वंतरि एवं सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की।

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