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विशाल ट्यूमर के हटते ही दिल्ली के 14 वर्षीय धुरुव ने ली खुलकर सांस

 

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट838e5c3c cdac 4368 abaa 001145934ec3

फरीदाबाद:मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में चिकित्सकों ने दिल्ली निवासी 14 वर्षीय धुरुव के सीने से सफलतापूर्वक विशाल ट्यूमर को निकाल उसके फेफड़े को क्षतिग्रस्त होने से बचाया।

ट्यूमर के निकलने पर मरीज को बहुत राहत मिली। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद में लंग ट्रांसप्लांट एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ.कामरान अली ने बताया कि हमारे पास नॉर्थ दिल्ली से छाती में बाएं तरफ फेफड़े के नजदीक साढ़े तीन किलोग्राम के ट्यूमर के साथ एक किशोर (टीनेजर) आया। यह ट्यूमर 25×30 सेंटीमीटर बड़ा था।

एक साल के अंदर मरीज का लगभग 8-10 किलोग्राम वजन कम हो गया था। लगभग 10 दिन पहले बच्चे को खाना निगलने की समस्या शुरू हुई थी। सीटी स्कैन कराने पर हमें पता चला कि ट्यूमर दोनों फेफड़ो के बीच और हार्ट के ऊपर वाले हिस्से से निकलते हुए बाएं तरफ की छाती में घुसा हुआ था। ट्यूमर ने बाएं तरफ के फेफड़ें को पूरी तरह पिचकाया हुआ था और हार्ट,खाने की नली को छाती की दाएं तरफ धकेल दिया था।

इसलिए यह केस काफी चुनौतीपूर्ण था। हमने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए बड़ी सावधानी से सर्जरी कर ट्यूमर को बाहर निकाल दिया।

फेफड़े पर दबाव बना रहे ट्यूमर के हटते ही बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। स्वस्थ होने पर बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया। अगर अब सर्जरी न होती तो ट्यूमर के निरंतर बढ़ते दबाव के कारण बच्चे के बाएं तरफ का फेफड़ा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता था और हार्ट एवं खाने की नली जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंच सकता था।

डॉ.कामरान अली ने कहा कि सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर ने बच्चे के हार्ट को अपोजिट साइड में धकेल दिया था,ट्यूमर के दबाव के कारण बाएं (लेफ्ट) साइड के फेफड़ें की खून की मुख्य नस पूरी तरह पिचकी हुई थी और लेफ्ट साइड का फेफड़ा भी पूरी तरह पिचका हुआ था। बेहोशी भी इसमें काफी बड़ी चुनौती थी क्योंकि छाती की लेफ्ट साइड के सभी अंग राईट साइड में शिफ्ट हो गए थे।

ऐसे में बेहोशी की ट्यूब डालने में बहुत परेशानी होती है। इतने छोटे बच्चे में इतना बड़ा कट लगता है तो दर्द को नियंत्रित करना भी चुनौतीपूर्ण होती है।

ऑपरेशन द्वारा छाती के अन्दर महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाए बिना पूरे ट्यूमर को लगभग साढ़े 3 घंटे में निकाल दिया। ट्यूमर के दबाव के कारण पिचका हुआ लेफ्ट साइड का फेफड़ा सर्जरी के दौरान ही फूल गया और फिर से अपने सामान्य आकार में आ गया।

ऑपरेशन के 3 दिन बाद स्वस्थ होने पर बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया। इस सर्जरी में मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स से पीडियाट्रिक कार्डियो थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ.तरुण रैना रमन का भी विशेष योगदान रहा। इस तरह के ज्यादातर ट्यूमर के लक्षण एडवांस्ड स्टेज में ही सामने आते हैं जिनमें सांस का फूलना,खांसी आना,खांसी में खून आना,वजन कम होना,भूख न लगना,छाती में दर्द होना,खाना निगलने में परेशानी आना आदि शामिल हैं।

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