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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICRDEEE 2022 का हुआ उद्घाटन

फरीदाबाद से खुशी वत्स की रिपोर्ट

फरीदाबाद:जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय‌ वाईएमसीए फरीदाबाद में सम्मेलन हुआ। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो.एसके तोमर ने की। हरियाणा में जल्द ही राज्य भर में सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्ज करने के लिए एक बुनियादी ढांचा सुविधा होगी क्योंकि राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने और राज्य में चार्जिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार की है।

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नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं के निर्माण का प्रस्ताव है,इसका खुलासा हरियाणा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के महानिदेशक डॉ हनीफ कुरैशी ने किया,जो’इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में हालिया‌ विकास'(आईसीआरडीईईई 2022) पर आयोजित दो दिवसीय एआईसीटीई प्रायोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे। सम्मेलन में आईआईटी दिल्ली के प्रो.भीम सिंह मुख्य वक्ता थे।

सम्मेलन डॉ साक्षी कालरा और नितिन गोयल द्वारा बुलाई गई। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ.कुरैशी ने कहा कि भारत ने 2030 तक अक्षय ऊर्जा से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, राज्य सरकार ने पहले ही हरियाणा जैव-ऊर्जा नीति और हरियाणा सौर ऊर्जा नीति पेश की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की इलेक्ट्रिक वाहन नीति न केवल स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करेगी, बल्कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र भी बनाएगी। ईवीएस चार्जिंग सुविधाओं को नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू बताते हुए,डॉ कुरैशी ने कहा कि देश में बढ़ते वाहनों के प्रदूषण को दूर करने के लिए ई-वाहन ही एकमात्र समाधान है। ई-वाहन को बढ़ावा देने के लिए पहला कदम राज्य में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है और हरियाणा का नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में स्थापित किए जा रहे चार्जिंग स्टेशन सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो.एसके तोमर ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार अधिक से अधिक समाज केंद्रित होते जा रहे हैं और देश के सतत विकास से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए शिक्षण संस्थानों को उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसंधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं,टेक्नोक्रेट और शिक्षाविदों को अपने संबंधित क्षेत्रों में अंतःविषय
अनुसंधान और प्रथाओं पर चर्चा करने और सतत विकास के लिए स्मार्ट समाधान प्रदान करने के लिए इस तरह के सम्मेलनों की आवश्यकता होती है।

मुख्य भाषण में प्रो.भीम सिंह ने’ग्रिड इंटरएक्टिव फोटोवोल्टिक (पीवी) सिस्टम’पर व्याख्यान दिया और भारत की वर्तमान सौर क्षमता और इसके भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा की। उन्होंने सोलर और ग्रिड के बीच उपलब्ध इंटरफेसिंग सिस्टम के प्रकारों के बारे में बताया। इससे पूर्व,सम्मेलन अध्यक्ष एवं अध्यक्ष,विद्युत अभियांत्रिकी विभाग,प्रो.पूनम सिंघल ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया।

डीन एफईटी प्रो एमएल अग्रवाल ने सम्मेलन के बारे में विस्तार से बताया और बताया कि सम्मेलन के दौरान चार आमंत्रित व्याख्यान होंगे और सम्मेलन के विषयों पर लगभग 50 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में छात्रों और शोधार्थियों द्वारा एक परियोजना और पोस्टर प्रदर्शनी भी है। सत्र के अंत में कुलसचिव डॉ.एसके गर्ग ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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