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सिसवा बाजार महराजगंज
फाल्गुन पूर्णिमा को ही उत्तरप्रदेश के जनपद हरदोई में राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका के गोद में बैठाकर आग के हवाले कर दिया था। विष्णु द्रोही होने के कारण उसके नगर को हरिद्रोही कहा जाने लगा। कालांतर में हरिद्रोही ही हरदोई कहलाया ।कहा जाता है कि हरदोई के कारण भगवान को दो बार अवतार लेना पड़ा, इसलिए भी इस नगर का नाम हरदोई पड़ा।
प्रथम हिरण्यकशिपु के वध हेतु नरसिम्ह अवतार और द्वितीय बलि के कारण वामन अवतार। मान्यता है कि हरदोई में श्रवण देवी मंदिर के पास ही वो कुंड था जहां होलिका जली थी। फाल्गुन पूर्णिमा को ही भगवान कृष्ण ने पूतना का वध किया था। इसकारण ब्रज में भी होली का त्यौहार विशेष हो जाता है। बाद में दाऊ और कन्हैया ने गोपियों के साथ होली के त्यौहार को विशेष बना दिया। भगवान अपने भक्त ( प्रह्लाद) के रक्षार्थ स्थापित त्यौहार को अमर बना गए।इसी फाल्गुन पूर्णिमा को ही कामदेव के पुनर्जन्म का वरदान भगवान शंकर ने रति को दिया था। फाल्गुन पूर्णिमा के आठ दिन पहले अष्टमी तिथि को कामदेव ने भगवान शंकर की तपस्या भंग करनी चाही।
भगवान शंकर काम्यक वन में कठोर तपस्या रत थे। कामदेव के इस कुचेष्टा पर शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया ।कामदेव की पत्नी रति ने अष्टमी से पूर्णिमा तक कठोर तप कर शिव जी को प्रसन्न किया। अष्टमी से पूर्णिमा तक के इस आठ दिन को होलाष्टक कहते हैं और इस बीच में किसी भी नए एवं शुभ कार्य को नहीं किया जाता। आठवें दिन फाल्गुन पूर्णिमा को ही शिव ने रति की तपस्या पर प्रसन्न होकर कामदेव के पुनर्जन्म का वरदान दिया और पुनर्जन्म के पहले तक बिना शरीर के भी विद्यमान रहने का वर दिया तथा पुनर्जन्म होने तक रति को महाकाल वन ( वर्तमान उज्जैन) में तप और निवास करने को कहा। इसी दिन से कामदेव का एक नाम अनंग ( बिना अंग के ) पड़ा। द्वापर में कृष्ण भगवान की पत्नी रूक्मणी जी के गर्भ से कामदेव का पुनर्जन्म हुआ जिनका नाम प्रद्युम्न रखा गया। कामदेव के शरीर को दाह से मुक्ति मिले इसलिए कुछ जगहों पर होलिका दहन में आम्र का बौर और चंदन भी डाला जाता है। फाल्गुन भारतीय / हिन्दू वर्ष का अन्तिम माह भी है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही हिंदू नव वर्ष का प्रारम्भ भी हो जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को ही सृष्टि के प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था जिससे मानव जाति का प्रारंभ माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा उल्लास का,विजय का , चेतना का, रंगों का और इन सभी कारणों से खुशियों का त्यौहार है। अतः होली का त्यौहार मन के विकारों को निकाल कर आपसी भाईचारे व सौहार्द पूर्वक आनंदमय ढंग से मनाने की ऐसी परंपरा है जो व्यक्ति को तनाव से दूर ले जाकर उसके अंदर एक नई ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार करता है इसलिये होली को शांतिपूर्वक आनंदमय ढंग से बिना कोई ओछी हरकत किए हुए मनना चाहिए ।होली खेलते समय हम दूसरे की सुविधाओं का भी ध्यान रखकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन के मार्गो को प्रशस्त करने का सार्थक प्रयास करना चाहिए।
इस बाबत अखिल भारतीय केसरिया हिंदू परिषद के प्रदेश संगठन प्रमुख पंडित फणींद्र कुमार मिश्र,चीफ ब्यूरो मनोज शर्मा व मंडल चीफ ब्यूरो राजेश बर्मा का कहना है कि होली एक पवित्र त्यौहार है जो हमारे धार्मिक मान्यताओं के साथ जुड़ा हुआ है इसलिए हमें आपसी द्वेष भूल कर जनहित में सारे गिले शिकवे दूर कर मनाना चाहिए क्योंकि कहीं ना कहीं से यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत को अंतरमय ढंग से प्रदर्शित करता है। पूर्वी प्रदेश अध्यक्ष शत्रुघ्न मिश्रा ,गोरखपुर मंडल अध्यक्ष सतीश कुमार मिश्रा, जिला प्रवक्ता प्रेमसागर चौबे,शिवेंद्र सिंह, भुनेश्वर मिश्र, धनंजय मिश्र,मुन्ना पांडेय,सत्याशीष पांडेय,कमलेश पाण्डेय,सिसवानगर पालिका परिषद सभा सद वार्ड नं25 मीराबाई के कर्मठ व कानून वक्ता अश्वनी रौनियार व वार्ड नं 24 से राजन विश्वकर्मा, सभा सद राजेश वर्मा,नगर पालिका अध्यक्ष शकुंतला जायसवाल व उनके पति गिरजेश जायसवाल,अनिल जायसवाल, अनिल पांडेय,प्रसिद्ध एडवोकेट D.Kसिंह,ब्रह्मण महा सभा के जिलाध्यक्ष धीरज तिवारी, आदर्श शंकर शिशु मंदिर के शिक्षाविद प्रधानाचार्य राकेश शर्मा, प्रसिद्ध कवि आलोक शर्मा ,अमित रंजन, अरविंद जायसवाल सरस, गोविंद सोनी,RPIC प्रधानाचार्य नीरज तिवारी,बसंत चौधरी, रामबदन पटेल ग्राम प्रधान पति सेखुई बाजार,रामप्रसाद पटेल,शैलेश मिश्र,पशुपति शुक्ल,अवघेश चौधरी, अश्वनी मिश्र,वीरेंद्र पासवान,छोटेलाल यादव ,ऋषी केश पांडेय,गजेंद्र पांडेय,प्रवीण पाठक,प्रशांत पाठक,अरुण पांडेय,विवेक पांडेय,अमन सोनी ,मुकुंद सोनी,अजय दुबे,दिव्यांश तिवारी, अभिज्ञान जायसवाल, बादल जायसवाल,किशन मिश्र,प्रखर मिश्र, व ईश्वर द्विवेदी सहित तमाम लोगो ने समस्त जनपद वासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।रिपोर्ट फणीन्द्र कुमार मिश्र