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बिहार: जानें कैसे, 'लाल' गलियारे से होकर अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बना संतोष झा.

जानें कैसे, ‘लाल’ गलियारे से होकर अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बना संतोष झा
बिहार के दरभंगा में हुए दोहरे इंजीनियर हत्याकांड मामले में कोर्ट ने 10 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में मुख्य आरोपी संतोष झा और मुकेश पाठक को उम्र कैद की सजा हुई है। अपराध की दुनिया का ऐसे बेताज बादशाह बना संतोष झा
नक्सलियों के लाल गलियारे से होकर अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बने संतोष झा को किसी भी कोर्ट से सुनाई गई यह पहली सजा है। इससे पूर्व संतोष का जीवन मध्यम वर्गीय परिवार के संघर्ष गाथा के अनुरूप ही था।
ड्राइवर का काम करते थे संतोष के पिता
पिता चंद्रशेखर झा ड्राइवर का काम करते थे। लगभग चार एकड़ जमीन रहने के बावजूद बागमती के तांडव से खेतों में उपज नहीं होती थी। तीन भाई-बहनों में संतोष झा सबसे बड़ा है। उसकी दो छोटी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।
इंटर तक पढ़ा है संतोष
मात्र इंटर तक की पढ़ाई करने वाले संतोष घर की हालत को देख हरियाणा एक फैक्ट्री में काम करने गया और कुछ दिनों तक वहां काम किया। लेकिन संतोष के माता-पिता अपने एकलौते पुत्र को अपने से दूर नहीं रख सकते थे। लिहाजा संतोष गांव आया और पहले उसने सब्जी की खेती शुरू की।
जबरन करायी गई शादी
इसके बाद उसने मुर्गी फार्म भी खोला। साथ ही मारुती भान खरीदा, जिसे खुद वह भाड़े पर चलाने लगा। इसी बीच रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र के थुम्मा गांव के कुछ स्वजातीय लोगों ने जबरन उसकी शादी अपने गांव में एक लड़की से करा दी।
चार बच्चियों का बाप है संतोष
हालांकि, बिना तिलक-दहेज के इस आदर्श शादी को संतोष एवं उसके परिजनों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। उसकी जिंदगी की गाड़ी इसी तरह चल रही थी। इसी बीच वह चार बच्चियों का पिता भी बना, लेकिन गांव में जमींदार बंधुओं के खिलाफ सुलग रही आग के तपन से वह भी अपने आप को नहीं बचा पाया।
पिता पर हुआ जानलेवा हमला
इसी बीच उसके पिता पर सुबोध राय ने जानलेवा हमला किया। दरअसल, हर तरह से हावी जमींदार बंधुओं को उन्हीं की भाषा में जवाब देने के लिए सर्वप्रथम वर्ष 2001 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान नवल किशोर राय के खिलाफ मुखिया प्रत्याशी के रूप में प्रमोद ठाकुर को खड़ा किया गया।
लाल रास्ते पर चलने को मजबूर हुआ संतोष
इस चुनाव में नवल राय की जीत तो हुई, लेकिन नवल राय को प्रमोद ठाकुर से कड़ी टक्कर मिली थी। अपने रियासत के मुलाजिमों की इस जुर्रत ने जमींदार बंधुओं के खून में हलचल मचा दिया। लिहाजा, मुखिया चुनाव जितने के बाद नवल राय के भाई और उनके गुर्गे और बेख़ौफ़ हो गए। इसी के बाद से दोस्तिया गांव और ग्रामीणों की दुर्दशा की नींव पड़ गयी और संतोष को नक्सलियों के लाल रास्ते पर चलने को मजबूर होना पड़ा।
गिरफ्तारी के बाद संगठन ने किया किनारा
इधर, पटना में संतोष की हुई गिरफ्तारी के बाद सूबे के कई जिलों में हुए नक्सली घटना को लेकर की थाना की पुलिस रिमांड पर लेती रही। जेल में ही रहने के दौरान ही उसे महसूस हुआ कि नक्सली संगठन ने उससे किनारा करना शुरू कर दिया है।
यही नहीं, उसे अपने विश्वस्त सूत्रों से संगठन के गतिविधियों की जानकारी मिलती रही। संगठन में जाति-पाती हावी होने लगी। संगठन अपने उद्देश्य से भटकते हुए स्वार्थ सिद्धी का एक प्लेटफ़ॉर्म बन गया। संगठन की गतिविधियां गलत रास्तों की ओर मुड़ गयी।
जेल से निकलने के बाद बनाया ‘परशुराम सेना’
इन सब बातों के कारण संगठन को अलविदा कहने का मन संतोष ने जेल में रहने के दौरान ही बनाया और जमानत पर छूटने के बाद उसके मन में सामाजिक जीवन जीने के बीज अंकुरित होने लगे। परिणाम स्वरुप उसने कुछ लोगों का एक संगठन ‘परशुराम सेना’ नाम से बनाया।
परशुराम सेना के सदस्यों ने नवल किशोर राय की हत्या की
संगठन से लोग जुड़ने लगे। तभी परशुराम सेना के सदस्यों ने सीतामढ़ी के डुमरा रोड स्थित नवल किशोर राय के डेरा पर धावा बोलकर उसकी ह्त्या कर दी। उसके बाद परशुराम सेना का नाम भी अपराधी गतिविधियों से जुड़ गया। इसी बीच कुछ अपराधी गतिविधियों से जुड़े लोगों ने उससे संपर्क बनाना शुरू किया और उसके नाम का उपयोग कर रीगा थाना क्षेत्र के अन्हारी गांव स्थित सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में डाका डाला।
आपराधिक संगठन ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’
जिसमें अपराधियों ने कैश तो लुटा ही, साथ में बैंक के गार्ड की गोली मरकर हत्या कर दी। इस कांड में संतोष झा भी नामजद हुआ। इस घटना के बाद उसके पांव अब अपराध की दुनिया की और मुड़ गये और अपना एक आपराधिक संगठन ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ नाम से बनाया।
बन गया अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह
चुंकि परशुराम सेना का नाम आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने के बाद उसे नयी आपराधिक संगठन खड़ा करना पडा। जिस अपराधिक संगठन ने कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया। उसके बाद संतोष झा उत्तर बिहार में अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया, जो देश के बाहर रहकर अपने संगठन को संचालित करने लगा। रंगदारी के लिए उसके गुर्गे कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों को मौत के घाट उतारने लगे।
बहेड़ी घटना में कई सफेदपोश!
सूत्रों के अनुसार, बहेड़ी में उसके गुर्गों ने रंगदारी के लिए ही दो इंजीनियरों की हत्या कर दी थी। संतोष झा के बढ़े हुए अपराधिक कद से उसे राजनितिक संरक्षण भी मिलने लगा। जिसमें एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के अलावा एक विधान पार्षद का भी नाम सामने आया। इसके अलावा पुलिस महकमे के एक उच्चाधिकारी की सहानुभूति उसे मिलने की बात बताई जा रही है। जिस पदाधिकारी ने अपनी ओर उठ रहे ऊंगली को दबाने के लिए सफल विभागीय कार्रवाई भी करायी है।
 
रिपोर्ट विजय कुमार शर्मा ibn24x7news बिहार

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