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दिनेश गुप्ता

देवरिया। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां शैलपुत्री की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति, आरोग्य तथा खुशहाली की कामना की। सुबह से ही घरों और मंदिरों में धार्मिक वातावरण बना रहा। भक्तों ने माता रानी के जयकारे लगाकर पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। वे वृषभ अर्थात बैल पर सवार रहती हैं। मां का यह स्वरूप शक्ति, धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर विधि-विधान से कलश स्थापना की गई। मां दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए गए। भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ किया तथा मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप कर माता से आशीर्वाद मांगा।
मां शैलपुत्री की आराधना के लिए “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं ने इस मंत्र का जाप करते हुए माता रानी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। कई घरों में नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और पूजा-अनुष्ठान का संकल्प भी लिया गया।
शारदीय नवरात्रि भारतीय सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप अपने भीतर विशेष आध्यात्मिक संदेश समेटे हुए है।
नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में सदाचार, सेवा, संयम और सकारात्मक विचारों को अपनाने का संकल्प लिया। भक्तों की कामना है कि मां दुर्गा की कृपा से समाज में सुख-शांति, आपसी सद्भाव और समृद्धि बनी रहे तथा सभी के जीवन में खुशहाली आए।