फरीदाबाद: रमजान का मुबारक महीना हम सबको अल्लाह के बताएं रास्ते पर चलने का संदेश देता है। हम रोजे रखते हैं और अल्लाह की इबादत करना चाहिए। अल्लाह पाक का हम पर कर्म होता है।
यह महीना रहमतों और बरकतों वाला है। रोजे रखकर हमें गरीबों की भूख और प्यास का अहसास होता है। हम समझ पाते हैं कि असल में जिंदगी क्या है। दुनिया में रहकर हम ऐसे कर्म करें,जिससे दूसरों को खुशी मिले। रमजान का संदेश भी यही है कि हमें किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। इस महीने में बुराईयों से बचने की खास तौर से हिदायत दी गई और फरमाया गया है कि सच्चे रास्ते पर चलो।
यह जान लो कि अगर हम सच्चाई को अपनाते हैं तो वहीं मौलाना अबू सालिक अशरफी ने बताया कि यकिनन हमारी जिंदगी को बेहतरीन बनाने के लिए ही हमें सच के रास्ते दिखाए गए हैं। हम उन रास्तों पर चलेंगे तो आगे चलकर हमारी जिंदगी बेहतर होती जाएगी। आओ हम सब रमजान के इस मुबारक महीने में अल्लाह और उसके रसूल के बताएं हुए संदेशों पर अमल करें और ईमान के साथ जिंदगी गुजारें।
ईमान ही असली दौलत है,जो सबसे ज्यादा जरूरी है। तो वहीं बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव जामा मस्जिद के इमाम मौलाना जमालुद्दीन ने कहा कि रमजान अल्लाह का महीना है, जिसमें तीस दिनों तक रोजा रखा जाता है रोजे का मतलब ये नहीं है कि आप अल्लाह के लिए भूखे रहें, बल्कि रोजे का मकसद ये है कि आप भूखे रहेंगे तो आपको अहसास होगा कि भूख क्या होती है।
जब आपके सामने कोई भूखा आएगा तो आपको उसकी भूख का अहसास हो चुका होगा,तब आप उसकी मदद अवश्य करेंगे।