राकेश की रिपोर्ट | टीम IBN न्यूज़ | वाराणसी
वाराणसी: काशी के पवित्र कैथी स्थित कृष्ण सुदामा संस्थान की पंतजलि गौशाला में इस समय एक अनोखी रौनक देखने को मिल रही है। यहां महाराष्ट्र के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से लाई गई नंदी की दुर्लभ नस्ल लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। इसकी कद-काठी सिर्फ एक से डेढ़ फुट होने के कारण यह नंदी पूरे पूर्वांचल में चर्चा का विषय बन चुका है।
📍 महाराष्ट्र से पूर्वांचल तक नंदी का सफर
संस्थान के डायरेक्टर डॉ. विजय यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नंदी की नस्ल बेहद खास और दुर्लभ है, जो आमतौर पर महाराष्ट्र के गर्म पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। इस गौवंश को पंतजलि संस्था के सहयोग से यहां तक लाया गया है।
🙏 श्रद्धा और आस्था का केंद्र
गौशाला में आने वाले दर्शनार्थी इस नंदी के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान प्रकट कर रहे हैं। लोग इसे सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं, तस्वीरें लेते हैं और कुछ लोग इसे दुलार भी देते हैं। खास बात यह है कि इस जोड़ी को आए अभी एक महीना भी नहीं हुआ, फिर भी यहां दिनभर दर्शकों का तांता लगा रहता है।
🐄 पंतजलि की प्रेरणा और बाबा रामदेव का आशीर्वाद
डॉ. यादव ने बताया कि बाबा रामदेव ने स्वयं इस गौशाला की स्थापना की अनुमति दी और समय-समय पर संस्थान का दौरा कर हौसला बढ़ाते रहते हैं। इस गौशाला में गिर नस्ल की गायें व बछड़े भी मौजूद हैं।
🎓 शिक्षा, संस्कृति और सेवा का संगम
संस्थान परिसर में स्थित मेडिकल कॉलेज, डिग्री कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र भी रोज यहां आते हैं। डॉ. यादव का मानना है कि “सभ्यता, संस्कृति और शिक्षा से ही समाज का उत्थान होता है।” इसी सोच के तहत यह नंदी यहां लाया गया है।
🗣️ “गौप्रेम एक आईना है…”
हाल ही में एक राजनेता द्वारा दिए गए ‘गोबर से बदबू’ वाले बयान पर कटाक्ष करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि, “ऐसे लोगों के लिए यह गौवंश का प्रेम एक आईना है।”
डॉ. विजय यादव न केवल संस्थान के डायरेक्टर हैं, बल्कि पंतजलि यूथ पीठ के पदाधिकारी और भाजपा किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी भी हैं।