श्रावस्ती, इकौना तहसील:
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के इकौना तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसौरा माफी में एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जहाँ राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की मनमानी से कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना हो रही है।
पीड़ित कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि का सीमांकन करवाने के लिए धारा 24(1) के अंतर्गत हादबरारी दर्ज करवाई थी, जिस पर न्यायालय द्वारा राजस्व निरीक्षक और क्षेत्रीय लेखपाल को आदेशित किया गया था कि 15 दिन के भीतर सीमांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
📌 तीन साल से न्याय के लिए दौड़ रहा है पीड़ित
लेकिन आदेश के तीन साल बाद भी न सीमांकन हुआ, न ही न्यायालय में आख्या प्रस्तुत की गई। पीड़ित कृष्ण मुरारी का कहना है कि वे तीन साल से लगातार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है।
📢 पीड़ित का गंभीर आरोप
कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव ने राजस्व निरीक्षक और क्षेत्रीय लेखपाल पर मनमानी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश की भी अनदेखी की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की यह कार्यशैली न केवल जनता के अधिकारों का हनन है, बल्कि न्यायपालिका की अवमानना भी कही जा सकती है।
📍 प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
यह मामला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि कोर्ट के आदेश के बावजूद भी तीन वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? यह स्थिति केवल परसौरा माफी गांव की नहीं, बल्कि पूरे राज्य में भूमि विवादों के समाधान में देरी का प्रतीक बनती जा रही है।
📞 पीड़ित की मांग
पीड़ित ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से सीमांकन शीघ्र कराने तथा दोषी लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।