मनीष दवे IBN NEWS, भीनमाल
राजस्थान के भीनमाल स्थित बोटेश्वर महादेव मंदिर, कारलू में श्रावण मास के पावन अवसर पर भक्तगण एक विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान “पार्थेश्वर चिंतामणि पूजन” कर रहे हैं। यह पूजन भगवान शिव को प्रसन्न करने का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।
🔱 क्या है पार्थेश्वर चिंतामणि पूजन?
पंडित करणा महाराज के अनुसार, श्रावण मास में प्रतिदिन 5100 मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका पंचामृत, गाय के दूध, दही आदि से विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। इस विशेष पूजा को पार्थेश्वर चिंतामणि अनुष्ठान कहा जाता है, जो शिवपुराण में वर्णित है और अत्यंत फलदायी माना गया है।
🌅 सुबह से शाम तक चलता है पूजन कार्यक्रम
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हर दिन शिवलिंग निर्माण के साथ-साथ वैदिक मंत्रों के उच्चारण द्वारा पूजा की जाती है।
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षोडशोपचार विधि से शिवलिंगों का पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न होती है।
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संध्या को इन शिवलिंगों को समीप के तालाब में विसर्जित किया जाता है, जो पवित्र परंपरा का हिस्सा है।
🌧️ अच्छी वर्षा और मनोकामना पूर्ति के लिए भक्तों की आराधना
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पूजा से न केवल वर्षा की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि उनके जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान भी होता है। श्रावण के पहले सोमवार को विशेष पूजा के साथ मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें भक्तों ने वर्षा की कामना के साथ भगवान शिव का पूजन किया।
📜 शास्त्रों में क्या है उल्लेख?
शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग पूजन विशेष रूप से श्रावण मास में अत्यंत प्रभावी होता है। यह भक्तों की मनोकामना पूरी करता है और चारों पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष – की प्राप्ति कराता है।