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राष्ट्रपति ने जे.सी.बोस विश्वविद्यालय के 5 वें दीक्षांत समारोह में 1536 विद्यार्थियों-शोधार्थियों को दी डिग्रियां

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्टWhatsApp Image 2024 08 21 at 7.51.50 PM 1

फरीदाबाद:भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति की चुनौतियों का सामना करने और इस से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश में जे.सी.बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। राष्ट्रपति ने शिक्षण संस्थानों को पूर्व छात्र संघ के योगदान को भी मजबूत एवं प्रभावशाली बनाने का सुझाव दिया। राष्ट्रपति मुर्मु हरियाणा के फरीदाबाद में जे.सी.बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,वाईएमसीए के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी।विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल हरियाणा एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने की। इस अवसर पर कुलपति प्रो.सुशील कुमार तोमर भी उपस्थित रहे। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति में विद्यार्थियों को उपाधि,पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये।

दीक्षांत समारोह में सभी छात्र-छात्राएं पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में नजर आये,जोकि ड्रेस कोड का हिस्सा था। दीक्षांत समारोह के दौरान वर्ष 2023 में अपनी डिग्री पूरी करने वाले 1536 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई,जिसमें 998 स्नातक,525 स्नातकोत्तर और 13 पीएचडी शामिल रहे। डिग्री प्राप्त करने वालों में 874 छात्र और 662 छात्राएं हैं। इसके अलावा,समारोह में दो मेधावी छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया,जिनमें से 75,000 रुपये राशि का एक राज्यपाल-कुलाधिपति स्वर्ण पदक ओवरऑल बीटेक टॉपर छात्रा इशिता जुनेजा को दिया गया तथा 65,000 रुपये राशि का एक मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक ओवरऑल बीटेक गर्ल्स टॉपर छात्रा काजल शर्मा को दिया गया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने दीक्षांत समारोह पर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में उपाधि प्राप्त कर रहे 13 शोद्यार्थियों में आठ छात्राएं है जो दर्शाता है उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हमारी बेटियां आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 43 प्रतिशत बेटियां है और वे चाहती है कि यह अनुपात और बेहतर हो। राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वविद्यालय में जे.सी.बोस यंग साइंटिस्ट अवार्ड की शुरूआत तथा शोध के लिए सीड मनी जैसे प्रावधानों का उल्लेख करते हुए शोध को बढ़ावा देने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा औद्योगिक एवं अकादमिक संस्थानों के साथ समझौतों तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विश्वविद्यालय में स्थापित सेंटर आफ एक्सीलेंस जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा हरित क्रांति का प्रदेश है। इस राज्य ने देश की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता में अहम भूमिका निभाई है।

चौथी औद्योगिक क्रांति में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जे.सी.बोस विश्वविद्यालय शोध एवं अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाते हुए अन्य संस्थाओं को राह दिखा सकता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी अनुसंधान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नीति में शोध की मानसिकता को मजबूत बनाने के लिए सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों में समग्र शिक्षा,स्नातक पाठ्यक्रमों में शोध एवं इंटर्नशिप के समावेशन आदि पर बल दिया गया है। देश में गुणवत्तायुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की गई है।

उन्होंने प्रसन्नता जताई कि विश्वविद्यालय द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने तथा उसके लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने की पहल की जा रही है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह संस्थान पांच दशकों से अधिक समय से युवाओं को कौशलवान एवं आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों की एक प्रभावशाली सूची है जो देश-विदेश में कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे है तथा विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता एवं परामर्श प्रदान करने में मदद कर रहे है।

उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षण संस्थानों को पूर्व छात्र संघ की भूमिका एवं योगदान को और अधिक मजबूत एवं प्रभावशाली बनाने के लिए कदम उठाया जाना चाहिए।राष्ट्रपति मुर्मु ने महान वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस को आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत बताते हुए कहा कि जे.सी.बोस का नाम सुनते ही प्रत्येक भारतीय को गर्व की अनुभूति होती है। राष्ट्रपति ने वनस्पति विज्ञान एवं रेडियो विज्ञान में जे.सी.बोस के अध्ययन एवं अनुसंधान का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थी उनके जीवन एवं कार्यों से प्रेरणा लेकर टेक्नोलॉजी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। शोध गतिविधियों में महिला शोद्यार्थियों की भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि उच्च शिक्षा में प्रदेश की बेटियां आगे बढ़ रही है और शोध में लड़कों की तुलना में उनकी भागीदारी उत्साहजनक है जो दर्शाता है कि हरियाणा की बेटियां प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है।

उन्होंने प्रौद्योगिकीय स्नातकों से आह्वान किया कि वे देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व पटल पर उच्च स्तर पर प्रतिष्ठित करने में अपनी भूमिका निभाये। दत्तात्रेय ने कहा कि महान वैज्ञानिक जे.सी.बोस के नाम पर इस विश्वविद्यालय का नामकरण इसे वैश्विक पहचान दिलायेगा। उन्होंने दीक्षांत समारोह के लिए विश्वविद्यालय को शुभकामनाएं दी तथा उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इससे पहले कुलपति प्रो.सुशील कुमार तोमर ने अपने स्वागतीय संबोधन में अतिथियों का अभिनंदन किया तथा वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुलपति ने विगत वर्षों की विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने विभिन्न गुणवत्ता मानदंडों पर खुद को साबित किया है।

इस समय विश्वविद्यालय में 60 से अधिक पाठ्यक्रम पढ़ाये जा रहे है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक 2023-24 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति,2020 को लागू करने की पहल की है तथा विश्वविद्यालय शोध कार्यों,स्टार्टअप,नवाचार एवं प्लेसमेंट गतिविधियों पर विशेष प्रोत्साहन दे रहा है। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन.प्रसाद,पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर,पुलिस आयुक्त ओ पी नरवाल,जिला उपायुक्त विक्रम सिंह सहित विश्वविद्यालय की विभिन्न निकायों के सदस्य,पूर्व छात्र संघ के सदस्य और जिला प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित थे।

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