फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: रमजान का पाक महीना रहमत और बरकत से भरपूर होता है। इस दौरान रोजे, नमाज और तरावीह के जरिए अल्लाह की इबादत की जाती है, और लोगों पर उसकी रहमत जमकर बरसती है।
समाजसेवी फिरोज खान ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने ‘बुखारी शरीफ’ में फरमाया है कि रोजे सिर्फ अल्लाह के लिए हैं, और इस दौरान की गई दुआएं कबूल होती हैं। उन्होंने कहा कि रमजान में इबादत और दुआ का विशेष महत्व है, लेकिन लापरवाह लोगों की दुआ कबूल नहीं होती।
नगर निगम चुनाव लड़ चुके रियाज ने बताया कि रोजा इफ्तार के समय, जब हलक सूख रहा हो और दस्तरखान पर कई किस्म के पकवान रखे हों, तब मांगी गई दुआ अल्लाह जरूर कबूल करता है। उन्होंने कहा कि सहरी के वक्त भी दुआओं की अहमियत होती है, क्योंकि उस समय अल्लाह अपने बंदों के सबसे करीब होता है। फरिश्ता मुनादी करता है कि कोई है जो अल्लाह से कुछ मांगना चाहता है? ऐसे में सहरी से पहले की गई दुआ विशेष रूप से स्वीकार होती है।
रियाज ने आगे बताया कि हजरत आयशा सिद्दीका (र.अ) ने जब रसूल पाक से पूछा कि शब-ए-कद्र की रात में अल्लाह से क्या मांगा जाए, तो पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि अल्लाह से माफी और रहमत की दुआ करो। अल्लाह गुनाहों को माफ करने वाला और दूसरों को माफ करने वालों को पसंद करता है। रमजान में अल्लाह शैतान को कैद कर देता है और अपने बंदों से कहता है, ‘तू दुआ मांग, मैं तेरी हर दुआ कबूल करूंगा।’
रमजान में कुरान की तिलावत करने का भी विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि यह महीना खुदा की रहमतों से भरपूर होता है और हर इबादत का कई गुना सवाब मिलता है।