बलिया। कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और पर्यावरण हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में शुक्रवार को कृषि भवन सभागार बलिया में नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी तरल उर्वरकों पर आधारित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में इफको क्षेत्र अधिकारी श्री आशीष गुप्ता द्वारा जिले के विभिन्न केंद्र प्रभारी और प्रगतिशील कृषकों को संबोधित करते हुए नैनो उर्वरकों के प्रयोग की विधि, लाभ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विस्तृत जानकारी दी गई।
🧪 नैनो डीएपी तरल का प्रयोग कैसे करें?
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बीज शोधन: 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज की दर से
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जड़ शोधन: 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर
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छिड़काव: फसल की 30-35 दिन की अवस्था में 4 मिलीलीटर/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें
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दानेदार डीएपी: मात्र आधी मात्रा में प्रयोग करें
✅ नैनो डीएपी के लाभ
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पारंपरिक डीएपी की तुलना में किफायती (₹600 प्रति बोतल)
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भंडारण और परिवहन में सुविधाजनक
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मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण में कमी
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पर्यावरण अनुकूल
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फसल की उपज और गुणवत्ता में वृद्धि
🌱 नैनो यूरिया प्लस का प्रयोग कैसे करें?
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फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में पत्तियों पर 4 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें
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दूसरा छिड़काव 15-20 दिन के अंतराल पर करें
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दानेदार यूरिया केवल प्रथम टॉप ड्रेसिंग में ही उपयोग करें
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शेष नाइट्रोजन की पूर्ति नैनो यूरिया प्लस से करें
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एक बोतल (500 ml) एक एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त
📣 किसानों से अपील
इफको अधिकारियों ने सभी किसानों से दानेदार उर्वरकों के स्थान पर नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी के प्रयोग का आह्वान किया। इससे न केवल उत्पादन लागत घटेगी, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने में भी योगदान देगा।
कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से बताया गया कि नैनो उर्वरक तकनीक भारत को आत्मनिर्भर कृषि की ओर ले जाने में एक क्रांतिकारी कदम है। किसानों को द्वितीय और तृतीय टॉप ड्रेसिंग के दौरान नैनो यूरिया प्लस व नैनो डीएपी का संयुक्त घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।