मीरजापुर जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में चकबन्दी प्रक्रिया के अंतर्गत प्रचलित ग्रामों में चल रहे कार्यों एवं वादों की समीक्षा करते हुए, विभिन्न धाराओं के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति पर विस्तार से जानकारी ली।
📋 धारा-7 के कार्यों की समीक्षा में लापरवाही पर कार्रवाई
बैठक के दौरान एस.ओ.सी. चकबन्दी द्वारा अवगत कराया गया कि धारा-7 (भू-चित्र का पुनरीक्षण) के अंतर्गत कुल 8 ग्रामों में चकबन्दी प्रक्रिया प्रचलित है, जिनमें से 5 ग्रामों में प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है।
हालांकि ग्राम हरदी मिश्र में चकबन्दी लेखपाल द्वारा लेट-लतीफी और लापरवाही बरते जाने पर वेतन रोकने की कार्यवाही की गई है।
🧾 अन्य धाराओं की समीक्षा और निर्देश
बैठक में निम्न धाराओं के कार्यों की समीक्षा की गई:
-
धारा-8: पड़ताल
-
धारा-9: विनिमय अनुपात निर्धारण
-
धारा-10: पुनरीक्षित वार्षिक रजिस्टर का निर्माण
-
धारा-20: प्रारंभिक चकबन्दी योजना का निर्माण व प्रकाशन
-
धारा-23: चकबन्दी योजना का पुष्टीकरण
-
धारा-24: कब्जा परिवर्तन
-
धारा-27: अंतिम अभिलेख की तैयारी
-
धारा-48(1) व 48(3): वादों का निस्तारण
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि समस्त चकबन्दी कार्य नियमानुसार और समयबद्ध ढंग से पूर्ण किए जाएं, जिससे ग्रामवासियों को समय पर लाभ मिल सके।
🧑💼 बैठक में उपस्थित अधिकारीगण
बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, बंदोबस्त अधिकारी (चकबन्दी) सहित सभी चकबन्दी अधिकारी और सहायक चकबन्दी अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सभी से अपेक्षा की गई कि वे विभागीय उत्तरदायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें।
🗣️ जिलाधिकारी का सख्त रुख
जिलाधिकारी ने कहा कि, “चकबन्दी प्रक्रिया ग्रामीण भूमि प्रबंधन की रीढ़ है। इसमें देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। जिन गांवों में अब भी कार्य शेष हैं, वहां प्राथमिकता से अभियान चलाकर उसे पूर्ण किया जाए।”